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15 दिन में 700 की तेजी दिल्ली की लॉरेंस रोड मंडी में चने का भाव 7,650– 7,700 प्रति क्विंटल तक पहुंचने का दावा।
एक महीने में 1,400 की बढ़ोतरी व्यापारी के मुताबिक, चने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया।
9,000 तक पहुंचने का अनुमान मौजूदा परिस्थितियां बनी रहने पर भाव और बढ़ सकते हैं।
उत्पादन में कमी का दावा देश में करीब 110 लाख मीट्रिक टन उत्पादन और खपत से लगभग 30 लाख टन की कमी का अनुमान बताया गया।
Dalhan Tilhan Inflation: देश में अल नीनो का प्रभाव अभी से ही दिखने लगा है। कमजोर मानसून के चलते कृषि क्षेत्र के घरेलू उत्पादन में कमी और विदेशी बाजारों में ऊंचे भाव की वजह से दलहन-तिलहन के दामों में भारी तेजी दिखाई दे रही है।
उत्पादन खपत के मुकाबले कम
इस बीच चने के बाजार में तेजी ने महंगाई की आग भड़का दी है। दलहन-तिलहन की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच देसी चना भी आम उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ने लगा है। कच्चे माल की कमी, महंगी ढुलाई और आगामी फसल की बिजाई को लेकर आशंकाओं ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर के मुताबिक, घरेलू चने का उत्पादन खपत के मुकाबले कम रहने से बाजार में उपलब्ध स्टॉक घट गया है।
उत्पादक और वितरक मंडियों में माल की कमी के कारण दाल मिलों को पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। इसका सीधा असर चने की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
ठक्कर के अनुसार, दशहरा-दिवाली की ग्राहकी निकलने के बाद महज 15 दिनों में चने के भाव 700 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर दिल्ली की लॉरेंस रोड मंडी में 7,650 से 7,700 रुपये तक पहुंच गए।
एक महीने में करीब 1,400 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई। उनका अनुमान है कि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं तो भाव पहले 8,500 और आगे चलकर 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी राहत के संकेत नहीं हैं। ठक्कर के मुताबिक, ऑस्ट्रेलियाई चने के अक्टूबर-नवंबर शिपमेंट के भाव पिछले साल की समान अवधि से करीब 250 डॉलर प्रति टन ऊंचे हैं।
उनके अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में भाव 790-800 डॉलर प्रति टन तक पहुंचने और वहां की फसल में गुणवत्ता संबंधी दिक्कतों की खबरों ने आयातित माल की लागत बढ़ाई है। इससे भारतीय बाजार में विदेशी चने की उपलब्धता महंगी पड़ रही है।
ठक्कर ने आशंका जताई कि अल नीनो के प्रभाव से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में चने की बिजाई प्रभावित हो सकती है। इस बार दाने छोटे रहने से उत्पादकता पर भी असर पड़ा है।
वहीं, ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने से उत्पादक मंडियों से दिल्ली तक माल मंगाना करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल महंगा पड़ रहा है। उनके मुताबिक, देश में चने का उत्पादन करीब 110 लाख मीट्रिक टन रहा, जो अनुमानित खपत से लगभग 30 लाख टन कम है।