नागपुर, अग्नि सुरक्षा, फायर एनओसी, महानगरपालिका,(सोर्स: सोशल मीडिया)  
नागपुर

स्कूल, अस्पताल और मॉल कितने सुरक्षित? नागपुर की इमारतों की खुली पोल; रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Nagpur Fire Safety: नागपुर में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर तस्वीर सामने आई है। कार्रवाई के दायरे में आई 1,264 इमारतों में से केवल 25 को ही अंतिम फायर NOC मिल सकी है, जिससे सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

अंकिता पटेल

Nagpur Fire Safety Municipal Corporation: नागपुर शहर की ऊंची इमारतें, स्कूल, अस्पताल, मॉल और रेस्टोरेंट कितने सुरक्षित हैं? इसका जवाब बेहद चौंकाने वाला है। महानगरपालिका के अग्निशमन और आपातकालीन सेवा विभाग के नवीनतम आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि शहर की 98 प्रतिशत से अधिक इमारतें आज भी खतरे के साये में खड़ी हैं। 30 अप्रैल 2026 तक की स्थिति के अनुसार 1,264 इमारतों पर आग बुझाने और जीवन रक्षक उपायों की कमी के कारण कार्रवाई की गई है जिनमें से केवल 25 इमारत्तों को ही अंतिम 'अनापत्ति प्रमाणपत्र' मिल सका है।

आंकड़ों की डराने वाली तस्वीर

  • कुल कार्रवाई: धारा 6 के तहत कुल 1,264 इमारतों पर कार्रवाई की गई है।
  • नोटिस जारी: धारा 8(1) के तहत 840 इमारतों को नोटिस दिया गया।
  • अगली कार्रवाई: धारा 8(2) क के तहत 638 मामलों में आगे की कार्रवाई हुई।
  • अनुपालन: अग्नि सुरक्षा उपायों का पूरी तरह से पालन केवल 291 इमारतों (कार्रवाई की गई इमारतों का मात्र 23%) ने किया।
  • लंबित मामले: 214 मामले अभी भी लंबित हैं। जबकि 23 मामले विभाग के पास 'अनापत्ति प्रमाणपत्र' के लिए दाखिल हैं। अंतिम प्रमाणपत्र केवल 25 इमारतों को मिला है।

स्कूल और अस्पताल भी असुरक्षित

शैक्षणिक संस्थान: 224 शैक्षणिक इमारतों पर कार्रवाई हुई लेकिन अंतिम एनओसी केवल 2 स्कूलों को मिली है। 89 मामले अब भी लंबित हैं। यह हजारों छात्रों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है। अस्पताल 123 अस्पतालों पर कार्रवाई की गई जिनमें से 43 ने अनुपालन किया लेकिन अंतिम एनओसी सिर्फ 1 अस्पताल को प्राप्त हुई। आग लगने की स्थिति में मरीजों को बाहर निकालना कितना कठिन होता है, यह सभी ने देखा है, फिर भी अस्पताल लापरवाह बने हुए हैं।

औद्योगिक और व्यावसायिक इमारतों की स्थिति 'विस्फोटक'

281 औद्योगिक इमारतों पर कार्रवाई की गई और 220 को नोटिस मिला लेकिन केवल 38 इमारतों ने मानकों को पूरा किया और 60 मामले अभी भी लंबित है। ज्वलनशील पदार्थों और रसायनों वाली इन इमारतों में आग लगने पर भारी तबाही हो सकती है।

व्यावसायिक परिसर : 143 परिसरों में से 109 पर कार्रवाई हुई। 45 ने सुधार किया लेकिन एनओसी एक को भी नहीं मिली (25 मामले लंबित हैं), बाजारों और दुकानों में रोज हजारों की भीड़ होती है जो पूरी तरह से असुरक्षित है।

रेस्टोरेंट और होटल 38 बार / रेस्टोरेंट पर कार्रवाई हुई, 30 ने अनुपालन किया लेकिन एनओसी किसी के पास नहीं है (20 मामले लंबित), बंद जगह और रसोई के कारण ये बेहद संवेदनशील हैं। इसके अलावा 32 आवासीय होटलों और हॉस्टल पर कार्रवाई हुई, पर प्रमाणपत्र एक को भी नहीं मिला।

मनपा की केवल दिखावे की कार्रवाई

मनपा ने 840 इमारतों को नोटिस दिए और 638 पर आगे की कार्रवाई की। प्रशासन काम कर रहा है लेकिन इसके बावजूद इमारत मालिक प्रशासन की क्यों नहीं सुन रहे हैं? 214 मामले अभी भी लंबित क्यों हैं? इसका साफ अर्थ है कि सिर्फ नोटिस देने का कोई असर नहीं हो रहा है। प्रशासन द्वारा पानी की आपूर्ति काटना, संपत्ति कर बढ़ाना या सीधे इमारत को सील करने जैसे कोई कठोर कदम नहीं उठाए जा रहे है।

नागरिकों के जीवन के साथ खेल कब रुकेगा?

सूरत, दिल्ली और मुंबई की भयानक आग की घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता। दर्जनों लोगों की जान गई थी। सिटी में भी छोटी-बड़ी आग लगने की घटनाएं हो चुकी है, फिर भी स्कूल, अस्पताल और मॉल मालिकों की नींद नहीं टूट रही है। 1,264 में से मात्र 25 इमारतों का सुरक्षित होना एक भयावह तस्वीर पेश करता है।

'अनापत्ति प्रमाणपत्र' महज एक कागज नहीं बल्कि हजारों लोगों की जान की गारंटी है। अब समय आ गया है कि नागपुर महानगरपालिका नोटिस का खेल' बंद कर सीधे और सख्त कार्रवाई का डंडा चलाए क्योंकि आग कभी नोटिस देकर नहीं लगती और जब लगती है तो सब कुछ खाक कर देती है।

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