हाई कोर्ट का फैसला (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

हाई कोर्ट का कड़ा प्रहार: बिना सीलबंद 'चिल्ड वाटर' बेचना जहर परोसने जैसा; 15 कंपनियों की याचिका खारिज

Chilled Water Manufacturers Association: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला। बिना सीलबंद और BIS मार्क के ठंडा पानी बेचना सेहत के लिए खतरनाक। 15 कंपनियों की याचिका खारिज, नियमों का पालन अनिवार्य।

प्रिया जैस

BIS Certification Drinking Water: बीआईएस (BIS) प्रमाणन मार्क के बिना और बिना पैक किए हुए पीने का पानी बेचने से रोकने को लेकर जारी किए गए सरकारी आदेशों को चुनौती देते हुए आरओ चिल्ड वाटर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के साथ ही 15 कंपनियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

9 वर्ष पूर्व दायर इस याचिका पर अब सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने पीने के पानी की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बिना सीलबंद कंटेनरों में ठंडा पानी बेचना न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि मानवीय स्वास्थ्य के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

नियमों के विपरीत मांग

याचिकाकर्ताओं ने उन सरकारी आदेशों को चुनौती दी थी जो उन्हें बीआईएस (BIS) प्रमाणन मार्क के बिना और बिना पैक किए हुए पीने का पानी बेचने से रोकते थे। अदालत ने खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियम, 2011 के क्लॉज 2.10.8 का हवाला दिया। इस नियम के अनुसार पीने के पानी को ऐसे सीलबंद कंटेनरों में भरा जाना अनिवार्य है जो सीधे उपभोग के लिए उपयुक्त हों। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की यह दलील कि उन्हें बिना सीलबंद कंटेनरों के ठंडा पानी बेचने की अनुमति दी जानी चाहिए, नियमों के पूरी तरह विपरीत है। अदालत ने जोर देकर कहा कि इस तरह की अनुमति देना मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होगा क्योंकि बिना जांचा-परखा पानी जनता को सप्लाई किया जाएगा।

राहत देने से इनकार

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ताओं को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले से यह साफ हो गया है कि पीने के पानी के व्यवसाय में सुरक्षा मानकों और सीलबंद पैकिंग के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। असुरक्षित और बिना सीलबंद पानी के स्वास्थ्य जोखिमों पर अदालत की मुख्य टिप्पणियां

  • मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक : हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना सीलबंद कंटेनरों में ठंडा या चिल्ड वाटर बेचने की अनुमति देना मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होगा।
  • बिना जांचा-परखा पानी : अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यदि बिना सीलबंद कंटेनरों में पानी बेचने की अनुमति दी जाती है तो उपभोक्ताओं को बिना जांचा-परखा पानी सप्लाई किया जाएगा जो उनकी सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
  • नियमों का उल्लंघन : अदालत ने ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियम, 2011’ के क्लॉज 2.10.8 का उल्लेख किया जिसमें यह अनिवार्य है कि पीने के पानी को सीलबंद कंटेनरों में ही भरा जाना चाहिए, ताकि वह सीधे उपभोग के लिए उपयुक्त और सुरक्षित हो।

इस तरह रहा याचिका का सफर

  • 7 जुलाई 2017 को प्रतिवादियों को जारी किया गया था नोटिस
  • 8 सितंबर 2017 को मध्यस्थ अर्जी भी दायर की गई। सुनवाई स्थगित रही।
  • 1 अक्टूबर 2018 को याचिका अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकृत।
  • अब 8 वर्ष बाद याचिका ठुकराते हुए मामले का अंतिम निपटारा।

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