MJPJAY Nagpur Hospitals: नागपुर जिले के गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (MJPJAY) शुरू की है।
इन योजनाओं के तहत पात्र परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक के उपचार की सुविधा दी जाती है। नागपुर जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने का अभियान भी तेज किया गया है, लेकिन कार्ड बनने के बाद मरीजों के लिए इलाज का विकल्प अभी भी सीमित है।
नागपुर जिले में 390 से अधिक अस्पताल होने के बावजूद योजना के पैनल में केवल 94 अस्पताल शामिल हैं। इनमें 71 निजी और 24 सरकारी अस्पताल बताए गए हैं। नागपुर में 48 लाख 81 हजार 842 नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक 19 लाख से अधिक कार्ड बनाए जा चुके हैं। यानी बड़ी संख्या में नागरिक योजना के दायरे में आ रहे हैं, लेकिन उनके लिए पैनल में शामिल अस्पतालों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में कई क्षेत्रों के मरीजों को योजना का लाभ लेने के लिए दूर स्थित अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में नागपुर जिले के निजी अस्पतालों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अक्टूबर 2024 में नागपुर में योजना से जुड़े अस्पतालों की संख्या करीब 52 थी। फरवरी 2026 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 86 और अब 94 हो गई है।
इसके बावजूद जिले में मौजूद 390 से अधिक अस्पतालों की तुलना में योजना के पैनल में शामिल अस्पतालों का हिस्सा सीमित है। खासकर गंभीर बीमारियों और विशेषज्ञ उपचार के लिए मरीजों के पास विकल्प और भी कम हो सकते हैं।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 2,399 बीमारियों की जांच और उपचार शामिल हैं। सरकार प्रत्येक उपचार और सर्जरी के लिए निर्धारित पैकेज दर तय करती है। निजी अस्पतालों की मुख्य आपत्ति इन्हीं दरों को लेकर है। अस्पतालों का कहना है कि दवाओं, इम्प्लांट, आईसीयू, विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, बिजली, उपकरण और अन्य खचों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जबकि कई उपचारों के लिए निर्धारित पैकेज राशि वास्तविक लागत के अनुरूप नहीं है।
अस्पतालों के सामने भुगतान में देरी भी बड़ी समस्या बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार नागपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों का 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पिछले चार-पांच महीने से लंबित है।
कुछ मामलों में दावों की जांच और ऑडिट के बाद भुगतान में कटौती होने की भी शिकायतें सामने आती रही हैं। लंबे समय तक भुगतान अटके रहने से दवाओं, मेडिकल सप्लायर और कर्मचारियों के भुगतान पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। ऐसे में योजना से जुड़े अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ समय पर भुगतान और पैकेज दरों की समीक्षा करना भी जरूरी है।