Nagpur Airport Cargo Target: नागपुर के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को देश का प्रमुख एविएशन, कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब बनाने के जीएमआर (GMR) समूह के महत्वाकांक्षी सपनों को बड़ा झटका लगा है। हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण और विस्तार की जिम्मेदारी संभाल रही जीएमआर कंपनी ने वार्षिक कार्गो क्षमता को 1,50,000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है, जहां कार्गो क्षमता बढ़ने के बजाय हवाई अड्डे से होने वाली मालवाहतूक में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
चालू वर्ष के शुरुआती 7 महीनों में 673 टन घटा कार्गो
वर्ष 2026 के शुरुआती सात महीनों की आधिकारिक आकडेबाजी जीएमआर और विमानन विभाग के लिए चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान नागपुर एयरपोर्ट से कुल 4,817.2 मीट्रिक टन माल ही रवाना हुआ, जबकि बीते वर्ष (2025) इसी समयावधि में यह आंकड़ा 5,490.6 मीट्रिक टन था।
इस तरह चालू वर्ष में कुल 673.4 मीट्रिक टन की सीधी गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में यहां से प्रतिमाह केवल 600 से 900 मीट्रिक टन माल की ही आवाजाही हो पा रही है।
आंतरराष्ट्रीय कार्गो का हिस्सा नगण्य, रायपुर के भरोसे सुविधा
नागपुर से संतरा, चावल, दवाइयां, इंजीनियरिंग उत्पाद और विमानों के स्पेयर पार्ट्स (Parts) का निर्यात किया जाता है, लेकिन इसकी मात्रा बेहद कम है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की कमी के कारण इस वर्ष जुलाई तक कुल 4,817.2 मीट्रिक टन में से महज 37.7 मीट्रिक टन माल ही विदेश भेजा जा सका, जो कि पिछले साल के 45.5 मीट्रिक टन से भी 7.8 मीट्रिक टन कम है।
हैरान करने वाली बात यह है कि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर से आने वाले फल-सब्जियों के निर्यातक नागपुर कार्गो सुविधा का उपयोग कर रहे हैं, जबकि विदर्भ और नागपुर के स्थानीय उद्योगपति इस हवाई मार्ग का लाभ उठाने में अब भी पीछे हटे हुए हैं।
प्रत्यक्ष उपयोग बढ़ाना जीएमआर के लिए बड़ी चुनौती
नागपुर से वर्तमान में केवल 2 अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाएं संचालित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नागपुर शहर को असल मायनों में कार्गो हब बनाना है, तो केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार काफी नहीं होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों (Direct International Connectivity) की संख्या बढ़ानी होगी।
1.5 लाख टन के विशाल लक्ष्य को पाने के लिए केवल डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय उद्योगों को जोड़कर इसका प्रत्यक्ष उपयोग (Capacity Utilization) बढ़ाना जीएमआर के सामने सबसे बड़ी परीक्षा होगी।