Nagpur High Court Air Pollution Case: नागपुर विदर्भ में बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनजर चल रहे एक मामले की सुनव सुनवाई के दौरान नागपुर महानगरपालिका ने कोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत कर सूचित किया कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए विभिन्न उपाय लागू किए जा रहे हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष हुई।
सुनवाई के दौरान न्यायालय मित्र शांतनु खेडकर ने अदालत का ध्यान महाराष्ट्र सरकार के पर्यावरण विभाग द्वारा 18 सितंबर 2019 को जारी किए गए सरकारी निर्णय की ओर दिलाया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य और शहर स्तर पर संचालन समितियां गठित की गई हैं।
उनके लिए नियमित बैठकें करना अनिवार्य है। सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण सीएआईआर-नीरी और आईआईटी बोर्ड, बॉम्बे ने 8 जुलाई 2024 को नागपुर शहर में वायु प्रदूषण पर एक विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस रिपोर्ट में प्रदूषण के मुख्य कारणों, निवारण के लिए उठाए जाने वाले उपायों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया है।
मनपा द्वारा अदालत में दायर हलफनामे में बताया गया है कि दिसंबर 2019 से जुलाई 2025 तक शहर स्तरीय संचालन समिति की 8 बैठकें आयोजित की गईं। इसमें वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए किए गए प्रयासों का विवरण भी दिया गया है जैसे कि सड़क स्वच्छता, धूल नियंत्रण, हरित क्षेत्रों में वृद्धि, प्रदूषण नियंत्रण उपाय और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय। हलफनामे के अनुसार 15वें वित्त आयोग के माध्यम से नागपुर शहर के लिए लगभग 200.93 करोड़ रुपये का कोष स्वीकृत किया गया है।
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उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे संबंधित संचालन समितियों की बैठकों और 8 जुलाई 2024 की रिपोर्ट की सिफारिशों के कार्यान्वयन के संबंध में हलफनामे के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करें। मनपा ने अपने हलफनामे में कहा है कि शहर में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।