Nagpur Mayo Hospital Bribery Case: नागपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मेयो अस्पताल के शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख एवं वैद्यकीय मंडल के अध्यक्ष डॉ. नंदकिशोर कमलनारायण जायसवाल तथा उनके स्टेनोग्राफर आशीष मेटेकर को रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ तहसील पुलिस थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एसीबी के अनुसार शिकायतकर्ता वर्धा के उपप्रादेशिक परिवहन (आरटीओ) कार्यालय में सहायक मोटर वाहन निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वे करीब तीन महीने तक मेडिकल अवकाश पर थे। अवकाश समाप्त होने के बाद जब वे पुनः ड्यूटी पर लौटे, तो विभागीय अधिकारियों ने उन्हें मेयो अस्पताल के वैद्यकीय मंडल के समक्ष उपस्थित होकर मेडिकल बोर्ड की सिफारिश और फिटनेस प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
शिकायतकर्ता जब मेयो अस्पताल में वैद्यकीय मंडल के समक्ष उपस्थित हुए, तब मंडल के अध्यक्ष डॉ. नंदकिशोर जायसवाल और उनके स्टेनोग्राफर आशीष मेटेकर ने मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया पूरी कर आवश्यक प्रमाणपत्र जारी करने के बदले 30 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता रिश्वत देने के पक्ष में नहीं थे, इसलिए उन्होंने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से की।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की गोपनीय जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक दिगंबर प्रधान के मार्गदर्शन में उप पुलिस अधीक्षक (डीवाईएसपी) महेश भोरटेकर, भारती गुरनुले तथा पुलिस निरीक्षक जितेंद्र वैरागड़े की टीम ने 24 जून को रिश्वत मांगने के आरोपों का सत्यापन किया। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि दोनों आरोपी शिकायतकर्ता से 30 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। बाद में वे 20 हजार रुपये लेने पर भी राजी हो गए।
एसीबी ने आरोपियों को रंगेहाथ पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना बनाई थी। हालांकि, कार्रवाई के दौरान आरोपियों को संदेह हो गया और उन्होंने शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम स्वीकार नहीं की। बावजूद इसके, एसीबी के पास रिश्वत मांगने के पर्याप्त साक्ष्य और सत्यापन उपलब्ध होने के कारण दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
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मंगलवार को एसीबी ने डॉ. नंदकिशोर कमलनारायण जायसवाल और आशीष मेटेकर के खिलाफ तहसील पुलिस थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया। इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले की आगे की जांच एसीबी द्वारा की जा रही है।