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सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने जेन-जी आंदोलन को विदेशी फंडिंग मिलने के आरोपों की गहरी जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि सबूत हों तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने प्रस्तुत किए जाएं।
जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के मामले में पार्टी नेताओं की न्यायिक हिरासत पर उन्होंने सवाल उठाए।
महाराष्ट्र में किसानों की समस्याओं और सूखे की स्थिति पर ध्यान देने की बात कही।
Jantar Mantar Tricolour Protest: जेन जी के आंदोलन को विदेशी निधि मिलने के प्रमाण हों तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। केवल आरोप लगाने के बजाय इस मामले की गहरी जांच होनी चाहिए।
यह चुनौती कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दी। दिल्ली रवाना होने से पहले नागपुर में दिपके ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा विपक्ष पर पाकिस्तान की भाषा बोलने का आरोप लगाए जाने पर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, चीन और अमेरिका का उल्लेख करने के बजाय राज्य की सूखाग्रस्त स्थिति और किसानों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के अवसर पर दीक्षाभूमि पहुंचे दिपके ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को नमन किया।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मामले में सीजेपी के 2 नेताओं को 5 दिन की न्यायिक हिरासत सुनाए जाने को लेकर अभिजीत दिपके ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि देश में अघोषित आपातकाल चल रहा है क्या।
उन्होंने कहा कि यदि आपातकाल लागू करना ही है तो सरकार को आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा करने का साहस दिखाना चाहिए, जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के कारण यदि 5 दिन न्यायिक हिरासत में रहना पड़ रहा है तो इस व्यवस्था को लोकतंत्र कैसे कहा जाए, आपातकाल के समय में भी ऐसी स्थिति नहीं थी।
अब देश में तिरंगा फहराना ही सबसे बड़ा अपराध बन गया है क्या? उन्होंने कहा कि देश पर कोई विचारधारा थोपने का प्रयास किया जा सकता है लेकिन भारत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों और संविधान के मार्ग पर ही चलेगा।
अभिजीत दिपके ने कहा कि इंडिया गठबंधन एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में कार्य करता है। हालांकि स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका लेना मतलब इंडिया गठबंधन के विरोध में होना नहीं है।
यह स्पष्ट करते हुए दिपके ने कहा कि राजनीतिक दलों में फूट, चुनाव चिहन सीज करना और मतदाता सूची से नाम हटाना जैसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय से उचित भूमिका की अपेक्षा है।
बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे का संदर्भ देते हुए उन्होंने सरकार की भूमिका की आलोचना की। कहा जा रहा है कि यदि मतदाताओं को इस बार मतदान करने का मौका नहीं मिला तो अगली बार मतदान करें तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अगला चुनाव लड़ने से मना किया जाएगा।