सूखाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क नहीं लेने के निर्देश।
पहले फीस वसूलने वाले कॉलेजों को राशि तत्काल लौटानी होगी।
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए कड़े उपायों पर चर्चा।
शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में एकसमान शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने की तैयारी।
परिणाम घोषित होते ही डिग्री प्रमाणपत्र डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराने के निर्देश।
विद्यार्थी चुनावों और विश्वविद्यालयों के निरीक्षण को लेकर भी बैठक में चर्चा।
Nagpur Akola Maharashtra drought Affected Students exam fee waiver: महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क नहीं लेने के निर्देश उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने दिए हैं। पहले वसूली गई फीस लौटानी होगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में पेपर लीक रोकने, एकसमान शैक्षणिक कैलेंडर और डिजिलॉकर पर डिग्री प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने सहित कई मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शैक्षणिक राहत देने के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार का परीक्षा शुल्क नहीं लेने को कहा गया है। यदि किसी विद्यार्थी से पहले ही शुल्क वसूल किया जा चुका है, तो उसे तत्काल वापस करना होगा।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है। विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क वसूलने की शिकायत मिलने पर संबंधित महाविद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
मुंबई स्थित सह्याद्री अतिथिगृह में मंत्री पाटिल की अध्यक्षता में राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ ऑनलाइन बैठक हुई। इसमें परीक्षा शुल्क के अलावा पेपर लीक रोकने, परिणामों में एकरूपता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और विद्यार्थी चुनावों जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
बैठक में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी उपाय करने पर जोर दिया गया। केंद्र सरकार के परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और पेपर लीक को रोकने वाले कानून के प्रावधान महाराष्ट्र राज्य में लागू करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई पर भी चर्चा हुई।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। मंत्री ने विश्वविद्यालयों को परीक्षा व्यवस्था में सतर्कता बरतने और अनियमितताओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से राज्य के सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में एकसमान शैक्षणिक समय सारिणी लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कामकाज में एकरूपता लाना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत चार वर्षीय ऑनर्स डिग्री पाठ्यक्रम की संरचना तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन करने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा पुनर्परीक्षा और एटीकेटी से जुड़े नियमों में एकरूपता लाने के लिए समान नीति तैयार करने की आवश्यकता जताई गई।
बैठक में राज्य के विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी चुनाव कराने की प्रक्रिया को दिवाली के बाद आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। संबंधित अधिकारियों से चुनाव कराने की पद्धति और प्रक्रिया पर व्यापक विचार-विमर्श कर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।
चंद्रकांत पाटिल 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करेंगे। इस दौरान शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था, विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं और छात्रावासों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
दौरे के दौरान मंत्री एक दिन विश्वविद्यालय के कामकाज की समीक्षा करने के बाद रात में विद्यार्थियों के साथ छात्रावास में ठहरेंगे। इस दौरान आवास व्यवस्था, भोजन, स्वच्छता, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाएगा।
विद्यार्थियों को डिग्री प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए परिणाम घोषित होते ही प्रमाणपत्र डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे विद्यार्थियों का समय और खर्च बचाने में मदद मिलेगी।