Next CM Of Maharashtra: महाराष्ट्र की राजनीति में भविष्य का मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर घमासान शुरू हो गया है। महायुति के तीनों बड़े घटक दल भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजीत पवार गुट) के भीतर से उठती आवाजें संकेत दे रही हैं कि 2029 की राह इतनी आसान नहीं होने वाली। बच्चू कडू का शिंदे प्रेम, जय पवार की अपनी मां के लिए सीएम पद की इच्छा और भाजपा का देवाभाऊ (देवेंद्र फडणवीस) के प्रति अटूट विश्वास, अब एक-दूसरे के आमने-सामने है।
हाल ही में शिंदेसेना से जुड़ें बच्चू कडू ने गठबंधन के भीतर एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दो टूक कहा, मेरी इच्छा है कि एकनाथ शिंदे ही मुख्यमंत्री बनें। मैं देवेंद्र फडणवीस के बारे में क्यों सोचूं? भले ही हम सत्ता में साथ हैं, लेकिन हर दल अपने नेता के बारे में सोचता है। मैं अपनी पार्टी का विस्तार और ज्यादा सीटें जीतने के बारे में ही सोचूंगा। कडू का यह बयान संकेत देता है कि शिंदे समर्थक किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के मूड में नहीं हैं।
बारामती उपचुनाव में अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद सुनेत्रा पवार का कद पार्टी में बढ़ा है। दिवंगत अजीत पवार के बेटे जय पवार ने अपनी मां के लिए मुख्यमंत्री पद की दावेदारी ठोक कर सबको चौंका दिया है। जय पवार ने कहा कि, बारामती की जनता और कार्यकर्ताओं का सपना था कि अजीत दादा मुख्यमंत्री बनें। अब वह सपना सुनेत्रा पवार पूरा करेंगी। अजीत पवार के निधन के बाद जिस तरह से पूरा पवार परिवार एकजूट दिख रहा है, उसने महायुति के गणित को उलझा दिया है। सवाल यह है कि अगर सुनेत्रा पवार को सीएम चेहरा नहीं बनाया गया, तो क्या वह महायुति में बनी रहेंगी?
भाजपा ने 2024 के चुनाव में 149 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि शिवसेना (शिंदे) ने 81 पर। राजनीति का सरल नियम है ज्यादा सीटें जीतनी हैं तो ज्यादा पर लड़ना होगा। क्या भाजपा आगामी चुनावों में शिंदे सेना को और अधिक सीटें देगी? यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है।
दूसरी ओर, भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए देवेंद्र फडणवीस ही निर्विवाद नेता हैं। फडणवीस की लोकप्रियता और एकतरफा लहर के बावजूद यदि उन्हें मुख्यमंत्री पद नहीं मिलता, तो क्या भाजपा का कैडर इसे हजम कर पाएगा?
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महायुति के भीतर यह शीतयुद्ध तीन बड़े सवालों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
2029 का चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि साख का भी होगा। फिलहाल महायुति में सब कुछ ठीक है का दिखावा भले ही हो, लेकिन अंदरूनी खींचतान बता रही है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की सियासत में बड़े भूकंप आ सकते हैं।