Bombay High Court ECI Hearing: महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर दायर याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट से एक अहम अपडेट सामने आया है। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि अदालत चुनाव आयोग (ECI) को महाराष्ट्र में मतदाता सूची से नाम न हटाने का कोई भी आदेश जारी नहीं करेगी। उच्च न्यायालय ने 'न्यायिक औचित्य' (judicial propriety) का पालन करने की बात कहते हुए इस मामले की सुनवाई को तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है।
सुनवाई के दौरान भारतीय चुनाव आयोग का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने अदालत को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय पहले से ही देश भर में एसआईआर से संबंधित व्यापक कानूनी चुनौतियों पर विचार कर रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित उस अंतरिम आदेश का संदर्भ दिया, जिसमें विभिन्न उच्च न्यायालयों को अपने-अपने राज्यों में एसआईआर की वैधता या उससे संबंधित पहलुओं पर समानांतर सुनवाई करने से रोका गया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता कुंभकोनी ने पीठ को यह भी सूचित किया कि कई अन्य उच्च न्यायालयों ने भी एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। इनमें से कुछ उच्च न्यायालयों ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे पहले सुप्रीम कोर्ट से इस बात का स्पष्टीकरण प्राप्त करें कि क्या उच्च न्यायालय इन मामलों की सुनवाई कर सकते हैं या नहीं।
सुनवाई के दौरान भारतीय चुनाव आयोग का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने अदालत को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय पहले से ही देश भर में एसआईआर से संबंधित व्यापक कानूनी चुनौतियों पर विचार कर रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित उस अंतरिम आदेश का संदर्भ दिया, जिसमें विभिन्न उच्च न्यायालयों को अपने-अपने राज्यों में एसआईआर की वैधता या उससे संबंधित पहलुओं पर समानांतर सुनवाई करने से रोका गया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता कुंभकोनी ने पीठ को यह भी सूचित किया कि कई अन्य उच्च न्यायालयों ने भी एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। इनमें से कुछ उच्च न्यायालयों ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे पहले सुप्रीम कोर्ट से इस बात का स्पष्टीकरण प्राप्त करें कि क्या उच्च न्यायालय इन मामलों की सुनवाई कर सकते हैं या नहीं।
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने चुनाव आयोग की दलीलों पर गौर किया। अदालत ने यह स्वीकार किया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश में महाराष्ट्र राज्य का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं था। इसके बावजूद, पीठ ने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही और इस याचिका का दायरा आपस में जुड़ता है, इसलिए समानांतर सुनवाई की कोई आवश्यकता नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जब उच्चतम न्यायालय का अंतरिम रोक आदेश पहले से मौजूद है, तो समानांतर मुकदमेबाजी चलाने का कोई उद्देश्य सिद्ध नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट में इस विषय पर 8 अक्टूबर को सुनवाई होना निर्धारित है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से अंतरिम राहत की गुहार लगाई थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया - माई लॉर्ड्स, तब तक के लिए कृपया अपने आदेश में यह कह दें कि महाराष्ट्र में मतदाता सूची से किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए।
मुख्य न्यायाधीश ने इस मांग को तुरंत खारिज करते हुए कह- नहीं, नहीं, नहीं, हम ऐसा कोई भी आदेश पारित नहीं करने जा रहे हैं... हम न्यायिक औचित्य का पालन करेंगे।
अदालत द्वारा अंतरिम आदेश देने से इनकार किए जाने के बाद, याचिकाकर्ता पक्ष को फिलहाल कोई फौरी राहत नहीं मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई तीन सप्ताह बाद के लिए टाल दी है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट में 8 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां देश में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं पर विचार किया जाएगा।