वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक परियोजना, प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक परियोजना की डेडलाइन बढ़ी: अब 17 मई 2028 तक होगी पूरी, लागत बढ़कर 18,120 करोड़ पहुंची

Versova Bandra Sea Link: मुंबई के वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक प्रोजेक्ट की समयसीमा बढ़ाकर 17 मई 2028 कर दी गई है। एमएसआरडीसी ने आरटीआई में खुलासा किया कि देरी के चलते लागत ₹18,120 करोड़ हो गई है।

रूपम सिंह

Highlights

  • वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक की नई समयसीमा 17 मई 2028 तय।

  • देरी के चलते MSRDC ने 1,421 दिन की समयावृद्धि मंजूर की।

  • परियोजना की संशोधित लागत बढ़कर ₹18,120.16 करोड़ हुई, फिलहाल ठेकेदार पर जुर्माना नहीं।

Mumbai Sea Link Project Delay: वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक परियोजना को पूरा करने की समयसीमा एक बार फिर बढ़ा दी गई है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) ने परियोजना के लिए 1,421 दिनों की समयवृद्धि मंजूर की है।

अब इसे 17 मई 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली की ओर से मांगी गई जानकारी के जवाब में महामंडल ने परियोजना में देरी के कारणों और ठेकेदार पर जुर्माने के प्रावधानों का विवरण दिया है।

मूल समयसीमा से चार साल आगे बढ़ा लक्ष्य

एमएसआरडीसी के अनुसार, मूल ठेके के तहत इस परियोजना को 21 जून 2024 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, विभिन्न कारणों से काम प्रभावित हुआ और परियोजना की समयसीमा बढ़ानी पड़ी। इसमें कास्टिंग यार्ड के लिए जगह उपलब्ध होने में देरी के कारण 250 दिन, कोविड महामारी और लॉकडाउन के चलते 180 दिन, संयुक्त उद्यम के पुनर्गठन और कानूनी बदलावों के कारण 483 दिन तथा काम के दायरे में बदलाव के कारण 508 दिनों की समयवृद्धि शामिल है।

काम के दायरे में बदलाव के तहत कोली समुदाय की मांगों के अनुसार पुल की रूपरेखा में संशोधन, मालाड स्थित कास्टिंग यार्ड का स्थानांतरण और अतिरिक्त संपर्क सड़कों का निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं।

ठेकेदार पर फिलहाल नहीं लगेगा विलंब हर्जाना

महाराष्ट्र राज्य परियोजना का ठेका मेसर्स बी. वर्ल्ड-अपको संयुक्त उद्यम के पास है। एमएसआरडीसी ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत समयवृद्धि के मद्देनजर फिलहाल ठेकेदार पर विलंब हर्जाना लगाने या उसकी वसूली करने का प्रावधान लागू नहीं होता।

हालांकि, भविष्य में यदि ठेकेदार के नियंत्रण में आने वाले कारणों से काम में देरी होती है, तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

संशोधित लागत 18,120 करोड़ रुपये के पार

परियोजना की लागत में भी वृद्धि हुई है। काम के दायरे में बदलाव, जीएसटी दरों में वृद्धि और अतिरिक्त संपर्क सड़कों के निर्माण के चलते संशोधित लागत करीब 18,120.16 करोड़ रुपये हो गई है।

अब एमएसआरडीसी के सामने परियोजना को नई समयसीमा के भीतर पूरा करने की चुनौती है। लगातार बढ़ती समयसीमा और लागत के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण कार्य निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ता है या नहीं।

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