Divyang Welfare Sachin Ahir: राज्य में पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को दिव्यांग प्रमाणपत्र (यूडीआईडी) समय पर बिना परेशानी उपलब्ध कराने के लिए अब गांव और वार्ड स्तर तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस मामले में विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहिर ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं। उपसभापति ने कहा कि
आंगनवाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर दिव्यांग व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाए और पात्र लाभार्थियों को यूडीआईडी प्रमाणपत्र दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
राज्य के दिव्यांग नागरिकों की लंबित समस्याओं को लेकर विधान भवन में सचिन अहिर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधायक बच्चू कडू, दिव्यांग विभाग के सचिव माणिक गुरसाल, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के सचिव ई. रवींद्रन और दिव्यांग सशक्तिकरण आयुक्त सत्यजीत बडे सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
उपसभापति ने कहा कि समय पर दिव्यांग प्रमाणपत्र मिलना दिव्यांग व्यक्तियों का अधिकार है। स्वास्थ्य विभाग और नगर विकास प्रशासन के पास लंबित प्रमाणपत्र संबंधी आवेदनों की सूची का तत्काल निपटारा किया जाना चाहिए। साथ ही ग्राम विकास विभाग को ग्राम पंचायत स्तर पर दिव्यांग सशक्तिकरण के लिए किए गए खर्च की जानकारी जुटाकर उसकी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने सभी विभागों को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षित 5 प्रतिशत निधि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र दिव्यांगों तक तत्काल पहुंचाने के लिए विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में दिव्यांग प्रमाणपत्र से जुड़ी शिकायतों और संदिग्ध प्रमाणपत्रों की जांच करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा दिव्यांगों के लिए जारी शासन निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनके लिए स्वतंत्र आवास योजना का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखने को कहा गया।
बैठक में अंत्योदय योजना का लाभ, दिव्यांगों के लिए कर्जमाफी योजना, प्रत्येक जिले में दिव्यांग भवन, दिव्यांग अधिकार कानून 2016 के तहत राज्य निधि का गठन, रेलवे के दिव्यांग आरक्षित डिब्बों में अन्य यात्रियों के प्रवेश पर रोक तथा गुणवत्तापूर्ण सहायक उपकरण उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
विधायक एवं प्रहार दिव्यांग संघटना के महाराष्ट्र संस्थापक बच्चू कडू ने परभणी और अकोला मॉडल को अन्य जिलों में लागू करने का सुझाव दिया। इन दोनों जिलों में सर्वेक्षण कर पात्र दिव्यांगों को यूडीआईडी प्रमाणपत्र वितरित किए गए हैं।