Tukaram Mundhe FDA Strict Rules: महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों, विशेषकर दूध और डेयरी उत्पादों में बढ़ती मिलावट को रोकने के लिए एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अपनी सख्त कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले आईएएस अधिकारी मुंढे ने दूध उत्पादकों और डेयरी प्रतिष्ठानों के लिए नई गाइडलाइन्स जारी की है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को मिलावटमुक्त और शुद्ध दूध सुनिश्चित करना है।
तुकाराम मुंढे द्वारा घोषित नई नियमावली के अनुसार, अब दूध और उससे बने उत्पादों की बिक्री में पूर्ण पारदर्शिता बरतनी होगी। नियमों के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
प्रशासन ने मिलावटखोरों और भ्रामक प्रचार करने वालों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान किया है। मुंढे ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई उत्पादक या विक्रेता मिलावट करते हुए पाया जाता है, या विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों को गुमराह करने की कोशिश करता है, तो उस पर 10 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह सख्त निर्णय राज्य भर में फैले मिलावट के जाल को तोड़ने के लिए लिया गया है, जिससे नागरिकों की सुरक्षा दांव पर लगी थी। गौरतलब है कि तुकाराम मुंढे पिछले कुछ समय से लगातार 'एक्शन मोड' में हैं। हाल ही में उनके नेतृत्व में की गई छापेमारी में एक ही दिन के भीतर 4 करोड़ रुपये का संदिग्ध स्टॉक जब्त किया गया था और इस मामले में 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तुकाराम मुंढे ने इस बात पर जोर दिया कि ग्राहकों को उनके द्वारा खरीदे जा रहे भोजन की शुद्धता जानने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होगा ताकि किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के हितों की रक्षा की जा सके।
यह भी पढ़ें: संभाजीनगर के नक्षत्रवाड़ी पंप हाउस की मरम्मत अंतिम चरण में, अगले सप्ताह शहर को फिर मिलेगा अतिरिक्त पानी
इस नई नियमावली के लागू होने से महाराष्ट्र में दूध के व्यापार में लगे लोगों के बीच हड़कंप मच गया है। सरकार का मानना है कि इन कड़े नियमों और भारी जुर्माने के डर से मिलावटखोरी पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा। फिलहाल, प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे जागरूक बनें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी विभाग को दें।