Siddhivinayak Temple Lost Love Belief: हिन्दू सनातन धर्म में रिद्धि सिद्धि के दाता विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य भगवान गणेश के मंदिर यूं तो सारे देश और विदेशों में भी हैं। भगवान गणेश के अनेक मंदिरों के बारे में आपने सुना होगा। कहीं बिना सिर वाले गणेश जी की पूजा होती है तो कहीं बिना सूंड वाले गणेश को भी पूजा जाता है।
महाराष्ट्र में तो मुंबई के सिद्धिविनायक से लेकर पुणे के दगड़ू सेठ गणपति मंदिर और कोंकण के अष्टविनायक मंदिरों की ख्याति विश्व स्तर तक फैली हुई है। लेकिन क्या आपने किसी ऐसे ऐतिहासिक मंदिर के बारे में सुना है, जिसकी स्थापना स्वयं शकुंतला ने की हो?
जी, हां या मंदिर मुंबई से सटे ठाणे जिले के कल्याण तालुके में स्थित है, जिनका नाम टिटवाला सिद्धिविनायक महागणपति मंदिर है। इस साल गणेश उत्सव के दौरान टिटवाला के इस सिद्धिविनायक मंदिर में जरूर भगवान गणेश के दर्शन करने जाएं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार टिटवाला सिद्धिविनायक महागणपति मंदिर की स्थापना शकुंतला ने अपने हाथों से की थी। हम महर्षि विश्वामित्र और अप्सरा मेनका की पुत्री शकुंतला के बारे में ही बात कर रहे हैं, जिनका विवाह राजा दुष्यंत से हुआ था। उन्होंने भरत को जन्म दिया था जो पांडवों और कौरवों के पूर्वज थे। भरत के नाम से ही इस देश का नाम भारत पड़ा। पौराणिक मान्यता के अनुसार जब ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण राजा दुष्यंत शकुंतला से अपने विवाह की बात भूल गये, तब शकुंतला ने भगवान गणेश से मदद की गुहार लगायी थी।
मान्यतानुसार भगवान गणेश ने सपने में आकर शकुंतला से टिटवाला में एक गणेश मंदिर स्थापित करने का मंत्र दिया था। मान्यता है कि शकुंतला ने अपने बेटे भरत की मदद से इस इस मंदिर की स्थापना की।
यह भी कहा जाता है कि शकुंतला ने जिस गणपति मंदिर का निर्माण किया था, कालांतर में वह एक तालाब में डुब गया। पेशवा माधवराव प्रथम के शासन के दौरान, शहर में सुखा पड़ा। तब शहर को पानी उपलब्ध करवाने के लिए इस तालाब को साफ करने का काम किया जा रहा था। जब तालाब से कीचड़ निकाला गया तो उसमें दबे हुए मंदिर के बारे में जानकारी मिली।
बताया जाता है कि पेशवा सरदार रामचंद्र मेहेंदले को सबसे पहले कीचड़ में दबी भगवान गणेश की मूर्ति मिली थी। इसके बाद ही इस मंदिर के जीर्णोद्धार का काम किया गया और यहां पत्थरों से एक नए मंदिर का निर्माण किया गया। कहा जाता है कि उस समय यह मंदिर काफी छोटा था। समय के साथ पेशवा द्वारा बनवाया गया मंदिर भी जर्जर हो गया था इसलिए 1965-66 में फिर से इसका जीर्णोद्धार किया गया और उसी स्थान पर ₹200,000 की लागत से एक नया मंदिर बनाया गया।
कहा जाता है कि टिटवाला सिद्धिविनायक महागणपति मंदिर में मांगी जाने वाली हर कामना जरूर पूरी होती है। इस मंदिर की ख्याति घर के सभी कलेश मिटाकर पति-पत्नी के सम्बंध प्रगाढ़ बनाने वाले गणपति के रूप में है।
टिटवाला के महागणपति मंदिर में दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं। गणेश चतुर्थी के समय तो यहां बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ होती है। कहा जाता है कि इस मंदिर में भगवान गणपति के नाभि और माथे पर एक मणि लगी हुई है। अगर किसी व्यक्ति को इन मणि के दर्शन हो जाए तो उसकी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं।
मध्य रेलवे के मुंबई-कसारा लाईन के टिटवाला स्टेशन के पूर्व में लगभग 2 किमी की दूरी पर स्थित महागणपति मंदिर बड़े तालाब के किनारे नयनरम्य परिसर में स्थित है। महाराष्ट्र सरकार ने इसे पर्यटन क्षेत्र भी घोषित किया है। इससे तालाब व मंदिर परिसर का विकास भी तेज गति से हुआ है। पहले मंदिर जाने के लिए यहां बड़े पैमाने पर तांगे चला करते थे। अब ज्यादातर स्टेशन से मंदिर तक रिक्शा व अन्य वाहनों की आवाजाही काफी बढ़ गई है।