हरि-हर की एकता का संदेश देगा पुणे का गणेशोत्सव, 25 फीट ऊंचे मंदिर में होंगे गणपति के दर्शन

Sharada Gajanan Harihar Mandir Theme: पुणे के अखिल मंडई मंडल के 133वें गणेशोत्सव में 25 फीट ऊंचा भव्य 'हरिहर मंदिर' तैयार, शारदा गजानन के साथ शिव और विष्णु के एकात्म रूप का होगा दर्शन।
Sharada Gajanan of Akhil Mandi Mandal, Pune
पुणे के अखिल मंडई मंडल के शारदा गजानन(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Akhil Mandai Mandal Pune Ganeshotsav 2026: पुणे के प्रसिद्ध अखिल मंडई मंडल के 133वें गणेशोत्सव वर्ष में इस बार भक्तों को भगवान शिव और भगवान विष्णु के एकात्म स्वरूप ‘हरिहर’ के दर्शन होंगे। मंडल के आराध्य ‘शारदा गजानन’ इस वर्ष भव्य और नयनाभिराम ‘हरिहर मंदिर’ में विराजमान होंगे। मंडल के अनुसार, इस धार्मिक झांकी के माध्यम से शैव और वैष्णव परंपराओं के संगम के साथ एकात्मता, समरसता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने का प्रयास किया गया है।

विविधता में एकता का संदेश देगी झांकी

सनातन परंपरा में भगवान विष्णु को ‘हरि’ और भगवान शिव को ‘हर’ कहा जाता है। मंडल के अनुसार, हरिहर स्वरूप दोनों आराध्य रूपों की एकात्मता का प्रतीक है। अखिल मंडई मंडल के अध्यक्ष अन्ना थोरात ने कहा कि धार्मिक झांकी के पीछे उद्देश्य भक्तों को विविधता में निहित एकता का संदेश देना और सामाजिक जीवन में प्रेम व समन्वय को बढ़ावा देना है। मंडल का मानना है कि गणेशोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संवाद का माध्यम भी है।

25 फीट ऊंचे मंदिर में विराजेंगे शारदा गजानन

पारंपरिक मंदिर वास्तुकला, नक्काशी और सनातन परंपरा से जुड़े प्रतीकों से सजाया गया यह हरिहर मंदिर श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण बनने जा रहा है। मंडल के अनुसार, 90 बाय 60 वर्ग फुट के विशाल मंडप में करीब 25 फीट ऊंची यह भव्य संरचना तैयार की गई है। कला निर्देशक विशाल ताजनेकर और गजेंद्र पांडे के मार्गदर्शन में मंदिर की संरचना को उच्च गुणवत्ता वाले फाइबर से तैयार किया गया है।

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एक ही प्रांगण में विष्णु और महादेव के दर्शन

मंडल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मंदिर प्रांगण में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को क्षीरसागर में शेषशय्या पर विराजमान भगवान विष्णु की मनोहारी प्रतिमा के दर्शन होंगे। इसके साथ ही भगवान महादेव की शिवपिंडी भी स्थापित की गई है। दोनों धार्मिक परंपराओं को एक ही झांकी में प्रस्तुत करने के पीछे एकात्मता और समरसता का संदेश प्रमुख है।

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कला और भक्ति का अनूठा संगम

मंडल के अनुसार, हरिहर मंदिर की संकल्पना में धार्मिक भावना के साथ कला और शिल्प का विशेष समावेश किया गया है। गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की संभावना है। ‘शारदा गजानन’ को हरि-हर के संयुक्त धाम में विराजमान करने की यह संकल्पना भक्तों के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है। मंडल का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से भक्ति के साथ सामाजिक प्रेम, शांति और राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुंचाना है।

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