उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे और कपिल सिब्बल (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
मुंबई

अयोग्य को बना दिया मुख्यमंत्री! शिवसेना मामले में SC में सिब्बल की आक्रामक दलीलें

Kapil Sibal On Shiv Sena Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट में लगातार 5वें दिन कपिल सिब्बल ने ठाकरे गुट की पैरवी की। चुनाव आयोग के फैसले को असंवैधानिक करार दिया।

अनिल सिंह

Shiv Sena Supreme Court Hearing: शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह 'धनुष-बाण' पर अधिकार को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में चल रही नियमित सुनवाई अब अपने सबसे निर्णायक दौर में पहुंच गई है। 

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति वी. मोहना और न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची की पीठ के समक्ष उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने लगातार पांचवें दिन आक्रामक दलीलें पेश कीं। सिब्बल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर केवल एकनाथ शिंदे गुट को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से असंवैधानिक फैसला सुनाया था।

अयोग्य व्यक्ति को बनाया गया मुख्यमंत्री, यह दलबदल को बढ़ावा

अदालत में जोरदार बहस करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत जो विधायक प्रथम दृष्टया अयोग्य घोषित किए जाने योग्य थे, केवल विधायी बहुमत के आधार पर उनमें से एक व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना दिया गया।

सिब्बल ने तर्क दिया, "किसी पार्टी का विधायी दल पूरी राजनीतिक पार्टी नहीं होता। अगर बाद में वे विधायक अयोग्य ठहरा दिए जाते हैं, तो आयोग द्वारा माना गया 'विधानसभा में बहुमत' का मानदंड पूरी तरह निरर्थक और खतरनाक हो जाता है। यह प्रक्रिया सीधे तौर पर दलबदल को बढ़ावा देती है।"

2018 के पार्टी संविधान और चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल

सिब्बल ने चुनाव आयोग द्वारा 1994 के 'जनता दल विवाद' के फैसले का हवाला दिए जाने पर भी गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि शिवसेना का संगठनात्मक ढांचा और विवाद जनता दल मामले से बिल्कुल अलग था।

शिंदे गुट द्वारा 2018 के पार्टी संविधान को अचानक 'अलोकतांत्रिक' बताए जाने पर सवाल उठाते हुए सिब्बल ने कहा कि उसी संविधान के तहत शिंदे मंत्री और विधायक बने थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29A(9) के तहत पार्टी संविधान के संशोधनों का विवरण देना केवल पंजीकरण के चरण के लिए अनिवार्य था, जिसे आयोग ने गलत तरीके से ठाकरे गुट के खिलाफ इस्तेमाल किया।

मामले को 7 जजों की संविधान पीठ के पास भेजने की मांग

बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि 5 जजों की पीठ के उस पुराने फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है, जिसमें कहा गया था कि विधानसभा अध्यक्ष की अयोग्यता याचिका और चुनाव आयोग की पार्टी चिन्ह पर सुनवाई एक साथ चल सकती है।

उन्होंने मांग की कि इस मामले को 7 न्यायाधीशों की बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए। इस पर न्यायमूर्ति जे. बागची और मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना एक सामूहिक जिम्मेदारी है और अयोग्यता जैसे मुद्दों पर एक स्वतंत्र न्यायाधिकरण या संस्थागत व्यवस्था के तहत समयबद्ध निर्णय होना आवश्यक है।

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