

Devendra Fadnavis Sukhbir Badal Call: महाराष्ट्र के पवित्र शहर नांदेड़ से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर गुरुवार, 13 अगस्त को एक गुरुद्वारे के पास जानलेवा हमला किया गया। इस घटना के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।
घटना की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सक्रियता दिखाई। उन्होंने न केवल प्रशासन को अलर्ट किया, बल्कि खुद सुखबीर सिंह बादल को फोन लगाया। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बादल की सेहत के बारे में विस्तार से जानकारी ली और उन्हें आश्वासन दिया कि हमलावर को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मीडिया को बताया कि सुखबीर बादल की हालत अब ठीक है और उन्हें उचित उपचार दिया जा रहा है। फडणवीस ने पुलिस प्रशासन को इस पूरी घटना की इन-डेप्थ जांच करने और हमले के पीछे के असली मकसद का पता लगाने का सख्त निर्देश दिया है।
जानकारी के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल अपनी पत्नी और अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल के साथ तख्त श्री हजूर साहिब में दर्शन करने पहुंचे थे। दर्शन के बाद जब वे माता साहिब कौर गुरुद्वारा के पास थे, तभी आरोपी जसपाल सिंह ने उन पर कृपाण से अचानक हमला कर दिया।
इस हमले में बादल घायल हो गए और उनके दाहिने हाथ पर चोट आई है। एक वायरल वीडियो में बादल को इमारत के अंदर जाते देखा जा सकता है, जहां उनके हाथ पर कपड़ा बंधा हुआ है। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी जसपाल सिंह को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अजीबोगरीब बयान देते हुए कहा कि उसे लगा और उसने हमला कर दिया। हालांकि, इस घटना ने वीआईपी सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शिरोमणि अकाली दल के उपाध्यक्ष संजीव तलवार ने इसे एक बड़ी सुरक्षा चूक करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिसके पास जेड प्लस सुरक्षा हो, उस पर इस तरह का हमला होना चिंताजनक है और यह पंजाब की एकता एवं अखंडता पर हमला है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दखल के बाद नांदेड़ पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या यह हमला किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था या यह एक व्यक्तिगत आक्रोश का नतीजा है। इस घटना के बाद पूरे नांदेड़ क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है।