सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके 
मुंबई

'नमस्कार, कसं काय पुणे!' सोनम वांगचुक का मराठी अंदाज; पेपर लीक के खिलाफ SPPU में कॉकरोच जनता पार्टी तैयार

Sonam Wangchuk Pune Protest: 'नमस्कार कसं काय पुणे!' सोनम वांगचुक का मराठी अंदाज में संदेश। पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के हक के लिए जल्द पुणे की सड़कों पर उतरेंगे। पढ़ें पूरी अपडेट।

गोरक्ष पोफली

Sonam Wangchuk Reaches Pune Joins Protest: पुणे के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय का परिसर आज एक बड़े ऐतिहासिक आंदोलन का गवाह बनने जा रहा है। लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पुणे पहुँच चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर मराठी में नमस्कार कसं काय पुणे कहकर शहरवासियों का अभिवादन किया, जिससे छात्रों और नागरिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। वांगचुक, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ मिलकर देश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ न्याय की गुहार लगाने आए हैं। इस आंदोलन ने राज्य के सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।

वीडियो संदेश के जरिए पुणेकरों से संवाद

दिल्ली से पुणे पहुँचते ही सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने मराठी भाषा का उपयोग कर स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया। वांगचुक ने कहा, नमस्कार कसं काय पुणे! मैं अभी-अभी दिल्ली से यहां पहुंचा हूं और अभिजीत जी के साथ मिल रहा हूँ। बहुत ही जल्द आप लोगों से बहुत जरूरी मुद्दों पर बात करने के लिए मिलने वाला हूँ। उनके साथ मौजूद अभिजीत दीपके ने भी मराठी में अपील करते हुए कहा कि वे और सोनम सर विश्वविद्यालय पहुँच रहे हैं और सभी पुणेकर इस शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होकर छात्रों के लिए न्याय की मांग करें।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और एजुकेशन मेनिफेस्टो

इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बिंदु केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षाओं में हो रही धांधली ने एक करोड़ से अधिक छात्रों का भविष्य अधर में लटका दिया है। आंदोलन के दौरान एक 'एजुकेशन मेनिफेस्टो' भी जारी किया जा रहा है। इस घोषणापत्र में कई महत्वपूर्ण सुधारों का प्रस्ताव है, जैसे:

  • प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं को रोकना।
  • परीक्षा परिणामों की समय पर घोषणा सुनिश्चित करना।
  • भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता लाना।
  • परीक्षा अधिकारियों की जवाबदेही तय करना।

पुणे से दिल्ली तक का सफर

यह देशव्यापी अभियान पुणे के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय से शुरू होकर देश के विभिन्न हिस्सों में जाएगा। अभिजीत दीपके के अनुसार, यह मार्च जयपुर, लखनऊ, अमृतसर और बेंगलुरु जैसे शहरों का दौरा करेगा और अंत में 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसका समापन होगा।

वांगचुक और दीपके ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा आंदोलन संवैधानिक दायरे में रहकर और पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा। पुणे में छात्रों का हुजूम जुटना शुरू हो गया है और 'जय महाराष्ट्र' व 'जय हिंद' के नारों के साथ यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ी क्रांति का संकेत दे रहा है।

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