शिवाजीराव मोघे (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
मुंबई

बीजेपी-कांग्रेस का 'अंबरनाथ प्रयोग' पड़ा भारी! शिवाजीराव मोघे ने याद दिलाया 2017 का यवतमाल फॉर्मूला

Ambernath Vikas Aghadi: अंबरनाथ में कांग्रेस पार्षदों के निलंबन पर शिवाजीराव मोघे की प्रतिक्रिया। बोले- स्थानीय स्तर पर वैचारिक विरोधियों से हाथ मिलाना नई बात नहीं, पर अनुमति जरूरी।

प्रिया जैस

Shivaji Rao Moghe: वरिष्ठ कांग्रेस नेता शिवाजीराव मोघे ने शनिवार को कहा कि अगर अंबरनाथ नगर परिषद के 12 कांग्रेस पार्षद भाजपा के साथ मिलकर अलग गुट बनाने के बजाय आपसी सहमति बना लेते, तो उनका निलंबन टाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि पार्षदों को पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से अनुमति लेनी चाहिए थी और इसके बाद स्थानीय निकाय के कामकाज को व्यापक जनहित में सुचारू रूप से चलाने के लिए ‘‘मौन सहमति'' बनानी चाहिए थी।

स्थानीय निकाय के लिए 20 दिसंबर को हुए चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थानीय इकाई ने सत्ता हासिल करने के लिए अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाडी' (एवीए) के बैनर तले गठबंधन कर लिया। इस गठबंधन के कारण भाजपा ने अपने सहयोगी शिवसेना को दरकिनार कर दिया, जो चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

12 पार्षदों का मंडल निलंबित

इस आघाडी में राज्य सरकार में भाजपा के एक अन्य सहयोगी अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) भी शामिल थी। इस अप्रत्याशित गठबंधन से असहज स्थिति में आई कांग्रेस ने बुधवार को अपने 12 पार्षदों और एक मंडल अध्यक्ष को निलंबित कर दिया। शुक्रवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा ने एक निर्दलीय सदस्य के साथ मिलकर गठबंधन बनाया और भाजपा को सत्ता से दूर रखते हुए अंबरनाथ स्थानीय निकाय में शासन का दावा पेश किया। पूर्व मंत्री मोघे ने कहा कि स्थानीय स्तर पर वैचारिक विरोधियों के साथ गठबंधन कोई नयी बात नहीं है और ये गठबंधन यह सुनिश्चित करने के लिए किए जाते हैं कि निर्वाचित निकाय जनता के हित में कार्य करें। उन्होंने 2017 के जिला परिषद चुनावों के बाद यवतमाल में कांग्रेस द्वारा भाजपा के साथ किए गए गठबंधन को याद किया। उन्होंने कहा, ‘‘स्थिति ऐसी थी कि कांग्रेस के समर्थन के बिना जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव संभव नहीं था।''

2019 के बाद टूटा गठबंधन

मोघे ने इस बात पर जोर दिया कि ग्राम पंचायत या जिला परिषद के चुनाव जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से जुड़े होते हैं और उनके विचारों तथा राय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अविभाजित शिवसेना की ओर से भी प्रस्ताव मिला था, लेकिन वह कांग्रेस को सत्ता में कोई हिस्सेदारी देने के लिए तैयार नहीं थी।

दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस को जिला परिषद अध्यक्ष पद ढाई साल के लिए देने पर सहमति जताई थी। इसका पहला कार्यकाल भाजपा ने अपने पास रखा। मोघे ने कहा, ‘‘भाजपा को हमारा समर्थन केवल जनता और यवतमाल जिले के कल्याण से जुड़े फैसलों के लिए था। इसमें कुछ भी लिखित रूप में नहीं था। 2019 में राज्य स्तर पर महा विकास आघाडी के गठन के बाद हमारा गठबंधन टूट गया और कांग्रेस ने शेष ढाई वर्षों के लिए जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए अविभाजित शिवसेना को समर्थन देने का फैसला किया।''

अंबरनाथ नगर परिषद में हुए राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए मोघे ने कहा कि राज्य नेतृत्व की अनुमति के बिना 12 पार्षदों का भाजपा के साथ मिलकर अलग गुट बनाना गलत था।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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