Shiv Sena UBT on Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी घमासान के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय के जरिए केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हालात पर करारा हमला बोला है। शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुआ हमला केवल किसी व्यक्तिगत राजनीतिक हस्ती पर हमला नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे गणतंत्र के लोकतांत्रिक ताने-बाने पर सीधा प्रहार है।
उद्धव ठाकरे गुट के मुखपत्र सामना के संपादकीय में घटना की भयावहता को रेखांकित करते हुए लिखा गया कि पत्थरों, लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस एक अनियंत्रित भीड़ ने ममता बनर्जी के वाहन को घेर लिया था। पार्टी का आरोप है कि इस हमले का स्पष्ट उद्देश्य एक सशक्त विपक्षी आवाज को हमेशा के लिए खत्म करना प्रतीत होता था।
संपादकीय में कहा गया कि उनका इस हमले में बाल-बाल बच जाना महज एक संयोग की बात है, लेकिन इस घटना ने एक भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा अब सभी स्वीकार्य सीमाओं को पार कर चुकी है।
शिवसेना (UBT) ने तर्क दिया कि राज्य में राजनीतिक समीकरणों में आए हालिया बदलावों के बाद से तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे प्रमुख सांसदों व विधायकों पर हो रहे हमलों का जिक्र करते हुए संपादकीय में सत्ताधारी वर्ग के विरोधाभास को उजागर किया गया।
पार्टी का कहना है कि जहां एक तरफ केंद्रीय नेतृत्व दलबदलुओं का गर्मजोशी से स्वागत करने में व्यस्त है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर राजनीतिक आधार मजबूत करने वाले नेताओं को जानलेवा हमलों का सामना करना पड़ रहा है।
संपादकीय के जरिए केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल दागे गए। पार्टी ने याद दिलाया कि विधानसभा चुनावों के दौरान निष्पक्ष प्रक्रिया और शांति व्यवस्था के नाम पर लाखों की संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था। लेकिन आज, जब राज्य में लक्षित राजनीतिक हिंसा अपने चरम पर है, तब वह तत्परता गायब दिख रही है।
पार्टी ने सवाल उठाया कि शांति बहाल करने के लिए केंद्रीय बलों को भेजने में यह अनिच्छा एक चिंताजनक दोहरे मापदंड को दर्शाती है। जब पूर्व मुख्यमंत्री, मौजूदा सांसद और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि बार-बार सड़कों पर हिंसा का शिकार हो रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर संस्थागत शासन के पूर्ण पतन का प्रतीक है।
शिवसेना (UBT) ने विपक्षी नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया की भी कड़ी आलोचना की। हिंसक हमले को 'जनता और एक राजनीतिक दल के बीच का व्यक्तिगत संघर्ष' करार देने को गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक बताया गया। पार्टी के अनुसार, ऐसी बयानबाजी भीड़ हिंसा को सही ठहराने और राज्य की जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने का काम करती है।