Sharad Pawar Writes Letter To CM Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में बारिश की खींचतान के कारण उपजे सूखे के गंभीर संकट के बीच राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में 265 तालुकों में सूखा घोषित किए जाने के बाद अब शरद पवार ने सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक और पत्र लिखा है। इस पत्र में शरद पवार ने संकट से जूझ रहे किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण जनता को तुरंत राहत प्रदान करने के लिए सरकार के सामने 17 प्रमुख मांगें रखी हैं।
शरद पवार ने आग्रह किया है कि सरकार औपचारिक कागजी प्रक्रियाओं का इंतजार किए बिना तत्काल कदम उठाए और आने वाले दशहरा- दिवाली के त्योहारों से पहले प्रभावितों के खातों में सीधी वित्तीय मदद जमा करे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सूखे की भीषण समस्या पर विस्तृत चर्चा और ठोस निर्णय लेने के लिए विधानमंडल का 3 दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की भी मांग की है।
शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे पत्र में राज्य सरकार से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है।
शेष क्षेत्रों में सूखा घोषणा: नियमों के औपचारिक मानदंडों का इंतजार न करते हुए वंचित रह गए अन्य सभी प्रभावित तालुकों को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित कर सुविधाएं लागू की जाएं।
जमीन राजस्व माफी: सूखा प्रभावित क्षेत्रों का पूरा लैंड रेवेन्यू पूर्ण रूप से माफ किया जाए।
संपूर्ण कर्जमाफी: किसानों के कृषि ऋण, सहकारी व राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्ज, फलबाग लोन, व्यक्तिगत कर्ज और महिला स्वयं सहायता समूहों के सभी ऋण पूरी तरह माफ किए जाएं।
सीधी आर्थिक सहायता: फसल नुकसान से प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की सहायता राशि और खेत मजदूर परिवारों को 25,000 रुपये की सीधी आर्थिक मदद दी जाए।
25 किलो मुफ्त अनाज: सूखा प्रभावित प्रत्येक किसान और खेत मजदूर परिवार को प्रतिमाह 25 किलो मुफ्त अनाज वितरित किया जाए।
बिजली बिल माफी व लोड शेडिंग बंद: कृषि पंपों का पूरा बकाया बिजली बिल माफ किया जाए, लोड शेडिंग तुरंत रोकी जाए और किसी भी किसान का बिजली कनेक्शन न काटा जाए।
शैक्षणिक और हॉस्टल फीस माफी: सूखाग्रस्त इलाकों के विद्यार्थियों की स्कूल- कॉलेज की ट्यूशन फीस, हॉस्टल और मेस की फीस पूरी तरह माफ हो।
चारा छावनियां व पशुधन अनुदान: मवेशियों के लिए चारा छावनियां, पीने का पानी और पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं या किसानों के खातों में सीधे चारा अनुदान जमा किया जाए।
टैंकर मंजूरी का अधिकार: गांवों में पीने के पानी के टैंकर मंजूर करने का अधिकार जिलाधिकारी के स्थान पर तुरंत स्थानीय तहसीलदारों को सौंपा जाए।
मनरेगा में छूट: MGNREGA के नियमों को शिथिल कर काम मांगने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 3 किलोमीटर के दायरे में तुरंत रोजगार दिया जाए।
फसलों व फलबागों की सुरक्षा: सूख रही फलबागों को बचाने के लिए सरकारी टैंकरों से पानी दिया जाए तथा केला, गन्ना, धान और फल उत्पादकों को तुरंत मुआवजा दिया जाए।
निधि का विकेंद्रीकरण: सूखा निवारण और राहत कार्यों का पूरा बजट सीधे विभागीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को हस्तांतरित किया जाए।
यहां यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि हाल ही में कुछ दिनों पहले भी शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर राज्य के गंभीर हालात से अवगत कराया था और आधिकारिक तौर पर सूखा घोषित करने का अनुरोध किया था। सरकार ने उस पत्र और जमीनी स्थिति की समीक्षा करते हुए राज्य के 265 तालुकों में सूखा घोषित कर राहत उपायों की शुरुआत की थी।
ऐसे में, जब कुछ ही दिनों पहले शरद पवार की सूखा घोषित करने की बात सरकार द्वारा मान ली गई थी, तब अब राजनीतिक गलियारों से लेकर किसान संगठनों के बीच यह सवाल कौंध रहा है कि क्या मुख्यमंत्री फडणवीस शरद पवार की इन 17 नई मांगों को भी मान्य करेंगे? क्या दशहरादिवाली से पहले किसानों के बैंक खातों में आर्थिक मदद पहुंचेगी? यह निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में देखने और सोचने वाली बात होगी।