Sharad Pawar NCP To Join NDA: महाराष्ट्र की सियासत से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में जारी मानसून सत्र और कई जिलों में बाढ़ के गंभीर संकट के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अचानक दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं। आधिकारिक तौर पर बताया जा रहा है कि नर्मदा परियोजना में चल रही विभिन्न समस्याओं को लेकर आज शाम दिल्ली में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है, जिसमें शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री जा रहे हैं।
हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को लेकर बेहद अलग और सनसनीखेज चर्चाएं गर्म हैं। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान राज्य की बाढ़ स्थिति के लिए केंद्रीय सहायता पर बात होने के साथ-साथ शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की संभावनाओं पर भी बड़ा फैसला हो सकता है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा बहुत तेजी से फैल रही है कि शरद चंद्र पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी महायुति और एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन सकती है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा आलाकमान के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर इस विषय पर अंतिम रणनीति तय करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, शरद पवार की पार्टी के भीतर इस समय दो स्पष्ट गुट नजर आ रहे हैं। पार्टी का एक बड़ा और प्रभावशाली धड़ा एनडीए में शामिल होने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट इसका कड़ा विरोध कर रहा है। इसी असमंजस के बीच दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर गहन मंथन जारी है।
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच शरद पवार की राकांपा और सुनेत्रा पवार की राकांपा के आपस में विलय (Merger) की खबरें एक बार फिर से मुख्यधारा की राजनीति में लौट आई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन दोनों गुटों का विलय हो जाता है, तो शरद पवार की पार्टी का एनडीए में शामिल होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
लेकिन इस बिखरी हुई पार्टी को एक साथ लाने और दोनों धड़ों को संतुष्ट करने के लिए आखिर क्या फॉर्मूला अपनाया जा सकता है, इसी जटिल विषय पर विचार-विमर्श करने के लिए मुख्यमंत्री का यह दिल्ली दौरा विशेष महत्व रखता है।
कुछ दिनों पहले तक राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि शरद चंद्र पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कांग्रेस में विलय हो सकता है। हालांकि, दोनों ही पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने इस विषय पर कोई ठोस रुख नहीं अपनाया और न ही जमीनी स्तर पर ऐसी कोई हलचल दिखाई दी, जिसके कारण वह मुद्दा पूरी तरह ठप हो गया।
अब कांग्रेस के बजाय दोनों राष्ट्रवादी समितियों के आपसी विलय और एनडीए में जाने की चर्चाएं दोबारा शुरू हो गई हैं। राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के बीच मुख्यमंत्री का दिल्ली जाना यह साफ संकेत देता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में बैकस्टेज पर कोई बहुत बड़ा गेम प्लान तैयार किया जा रहा है।