Shaktipeeth Expressway Land Acquisition: शक्तिपीठ महामार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत महाराष्ट्र के 13 जिलों में संयुक्त भूमि नापजोख का काम तेज हो गया है। अब तक 129 गांवों में 100 प्रतिशत भूमि नापजोख पूरी कर ली गई है, जबकि 15 गांवों में यह प्रक्रिया आंशिक रूप से पूरी हुई है। शेष गांवों में जिला प्रशासन किसानों से संवाद कर सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है।
वर्धा शहर के पवनार से सिंधुदुर्ग के पत्रादेवी तक प्रस्तावित शक्तिपीठ महामार्ग की लंबाई 856.765 किलोमीटर है। यह मार्ग विदर्भ, मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र और कोंकण के क्षेत्रों को जोड़ेगा।
प्रस्तावित महामार्ग 13 जिलों की 40 तहसीलों के 409 गांवों से होकर गुजरेगा। इन गांवों में भूमि अधिग्रहण से पहले संयुक्त भूमि माप की प्रक्रिया चल रही है। सरकार ने महामार्ग के संशोधित प्रारूप की अधिसूचना 5 मई को जारी की थी।
संशोधित प्रारूप के अनुसार वर्धा, यवतमाल, नांदेड़, हिंगोली, परभणी, बीड, लातूर, धाराशिव, सोलापुर, सातारा, सांगली, कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग में भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रिया चल रही है।
शक्तिपीठ महामार्ग धार्मिक, पर्यटन और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने के उद्देश्य से प्रस्तावित है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में संयुक्त नापजोख को महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। जिन गांवों में अभी सर्वे पूरा नहीं हुआ है, वहां प्रशासन किसानों से बातचीत कर सहमति बनाने पर जोर दे रहा है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार वर्धा में 2 तहसीलों के 20 गांव, यवतमाल शहर में 6 तहसीलों के 70 गांव, नांदेड़ में 1 तहसील के 11 गांव, हिंगोली में 3 तहसीलों के 40 गांव, परभणी में 2 तहसीलों के 6 गांव, बीड में 2 तहसीलों के 8 गांव, लातूर में 3 तहसीलों के 4 गांव और धाराशिव में 1 तहसील के 8 गांव शामिल हैं।
प्रशासन का कहना है कि भूमि नापजोख के साथ किसानों से संवाद और सहमति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि भूमि अधिग्रहण से जुड़ी आगामी कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जा सके।