शाइना एनसी (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

टा-टा... गुडबाय ममता दीदी, Shaina NC ने बंगाल की 91% वोटिंग को बताया टीएमसी की विदाई का संदेश

Shaina NC Statement: शाइना एनसी ने पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान को ममता बनर्जी और स्टालिन सरकार के अंत की शुरुआत बताया। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार व परिवारवाद के खिलाफ जनता का गुस्सा बताया।

गोरक्ष पोफली

Shaina NC vs Mamata Banerjee: चुनावी रणभेरी के बीच शिवसेना (शिंदे गुट) की कद्दावर नेता और प्रखर प्रवक्ता शाइना एनसी ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए भारी मतदान को लेकर विपक्षी दलों पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने इन राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग प्रतिशत को सत्ताधारी दलों टीएमसी (TMC) और डीएमके (DMK) के खिलाफ एक स्पष्ट 'जनमत संग्रह' (Referendum) करार दिया है। शाइना एनसी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई भारी मतदान हमेशा सत्ता विरोधी लहर का संकेत होता है?

ममता बनर्जी को अब 'टा-टा' कहने का वक्त

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के दौरान दर्ज किए गए 91% मतदान के आंकड़ों को 'अविश्वसनीय' बताते हुए शाइना एनसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अब हिंसा और डर के साये से बाहर निकल चुकी है।शाइना एनसी ने कड़े शब्दों में कहा, "पश्चिम बंगाल में 91% मतदान कोई साधारण आंकड़ा नहीं है, यह ममता बनर्जी और टीएमसी के कुशासन के खिलाफ जनता का आक्रोश है। मुझे लगता है कि अब उन्हें सी यू, टा-टा और गुडबाय कहने का समय आ गया है।" उन्होंने आगे दावा किया कि यह भारी जनादेश सुनिश्चित करता है कि आने वाले चरणों में, विशेषकर 29 तारीख को भी लोग इसी तरह बड़ी संख्या में बाहर निकलेंगे और टीएमसी के 'गुंडों' को करारा जवाब देंगे।

भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ जनता

सिर्फ बंगाल ही नहीं, शाइना एनसी ने दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु के चुनावी रुझानों पर भी अपनी राय रखी। तमिलनाडु में हुए 84% रिकॉर्ड मतदान को उन्होंने एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार की विदाई का संकेत बताया।

उनके अनुसार, तमिलनाडु की जनता डीएमके के 'भ्रष्टाचार' और 'परिवारवाद' (Family Trajectory) से तंग आ चुकी है। शाइना ने कहा, "जब भी लोग इतनी बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकलते हैं, तो वह मौजूदा सरकार के खिलाफ एक जनादेश होता है। डीएमके ने केवल एक ही परिवार को आगे बढ़ाने की जो राजनीति की है, उसे तमिलनाडु की जनता ने स्वीकार नहीं किया है।"

क्या कहता है भारी मतदान?

शाइना एनसी का तर्क है कि उच्च मतदान प्रतिशत हमेशा 'एंटी-इंकम्बेंसी' या सत्ता विरोधी लहर को दर्शाता है। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि एनडीए गठबंधन इन आंकड़ों को अपने पक्ष में देख रहा है। बंगाल में टीएमसी की कथित 'चुनावी धांधली' और तमिलनाडु में 'वंशवाद' की राजनीति को शाइना ने मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है। शाइना एनसी के इस बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि सत्ताधारी दल इन भारी मतदान प्रतिशत को 'परिवर्तन' की लहर के रूप में देख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि 2026 के चुनावी नतीजे शाइना एनसी के इन दावों पर कितनी मुहर लगाते हैं।

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