Sanjay Raut on Salman Khan in RSS Event: नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम ने देश का राजनीतिक पारा गरमा दिया है। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की मौजूदगी ने सभी को चौंका दिया, जिस पर शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने तीखा हमला बोला है। राउत ने संघ की 'मुस्लिम आउटरीच' नीति पर सवाल उठाते हुए इसे केवल एक दिखावा करार दिया और पूछा कि क्या संघ का यह प्रेम केवल चुनिंदा सेलिब्रिटीज तक ही सीमित है?
7 फरवरी को हुए इस कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत का संबोधन था, जहाँ सलमान खान की उपस्थिति ने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है।
संजय राउत ने सलमान खान की मौजूदगी पर चुटकी लेते हुए कहा कि आरएसएस को अपनी मंशा साफ करनी चाहिए। उन्होंने पूछा, "क्या संघ का मंच सभी मुसलमानों के लिए खुला है या यह केवल सलमान खान जैसे बड़े सितारों के लिए है?" राउत का तर्क था कि अगर संघ वास्तव में सामाजिक समरसता और समावेश की बात करता है, तो उसे यह स्पष्ट करना होगा कि क्या मुस्लिम समाज का एक आम नागरिक भी उसी सम्मान के साथ संघ के मंच पर स्थान पा सकता है। उन्होंने इसे एक 'इवेंट' बताते हुए कहा कि केवल लोकप्रिय चेहरों को बुलाने से विचारधारा में बदलाव नहीं आता।
संजय राउत ने केवल संघ को ही नहीं, बल्कि मुंबई की नवनिर्वाचित बीजेपी मेयर रितु तावड़े को भी निशाने पर लिया। मेयर के उस बयान पर जिसमें उन्होंने मुंबई से बांग्लादेशियों को बाहर निकालने की बात कही थी, राउत ने याद दिलाया कि इसकी शुरुआत दशकों पहले बालासाहेब ठाकरे कर चुके थे। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है, उनके घर जलाए जा रहे हैं, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर मौन क्यों हैं? उन्होंने सवाल किया कि बीजेपी केवल चुनावी लाभ के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाती है या वास्तव में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर है।
दिलचस्प बात यह है कि संजय राउत ने खुद खुलासा किया कि उन्हें भी संघ के इस शताब्दी समारोह का निमंत्रण मिला था, लेकिन व्यस्तता के कारण वे शामिल नहीं हो सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ अपने 100 साल पूरे होने पर अपनी छवि को अधिक उदार और सर्व-समावेशी बनाने की कोशिश कर रहा है। सलमान खान जैसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय मुस्लिम चेहरे को आमंत्रित करना इसी 'सॉफ्ट पावर' रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, विपक्ष इसे आगामी विधानसभा चुनावों और 2026 के राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहा है, जहाँ मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण एक बड़ा कारक हो सकता है।