Sanjay Raut Challenge PM Narendra Modi: देश में महिला आरक्षण बिल (Women's Reservation Bill) को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। शिवसेना (UBT) के कद्दावर नेता और सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर तीखा प्रहार किया है, जिसमें उन्होंने विपक्ष को महिलाओं की नाराजगी झेलने की चेतावनी दी थी। राउत ने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं का दिल नहीं जीत रही, बल्कि सरकारी खजाने का इस्तेमाल कर उनके वोट खरीद रही है।
संजय राउत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को विपक्ष को डराना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा, "ये धमकियां मत दीजिए कि अगर समर्थन नहीं किया तो नुकसान होगा। लोकतंत्र में जनता मालिक होती है और धमकियां काम नहीं आतीं।" राउत का यह बयान पीएम मोदी के उस भाषण के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।
संजय राउत ने महाराष्ट्र की 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' और अन्य राज्यों की इसी तरह की योजनाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर आपमें इतनी ही हिम्मत है, तो चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में जो पैसे भेजे जा रहे हैं, उन्हें बंद करके दिखाएं। महाराष्ट्र में 2-2 हजार रुपये और अन्य राज्यों में जो 10 हजार रुपये की 'खुराक' दी जा रही है, उसे रोकिए और फिर चुनाव मैदान में उतरिए। तब आपको पता चलेगा कि कितनी महिलाएं आपको अपने मन और दिल से वोट देती हैं। राउत ने आगे कहा कि पूरे देश में महिलाओं के वोट खरीदने का एक पैटर्न चल रहा है। चाहे बिहार हो या महाराष्ट्र, हर जगह सरकारी पैसे के दम पर चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे पैसों का खेल करार दिया।
गौरतलब है कि गुरुवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि जब भी चुनाव आते हैं, महिलाएं उन दलों को सबक सिखाती हैं जो उनके अधिकारों (आरक्षण) में बाधा बनते हैं। पीएम ने स्पष्ट किया था कि नारी शक्ति को उनका हक देना हमारी जिम्मेदारी है और यदि इसमें देरी होती है, तो इसका पूर्ण उत्तरदायित्व विपक्ष का होगा।
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अब संजय राउत के इस तीखे पलटवार ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में हलचल मचा दी है। शिवसेना (UBT) का आरोप है कि बीजेपी नीतिगत बदलावों के बजाय 'कैश-फॉर-वोट' मॉडल पर काम कर रही है। अब देखना यह है कि बीजेपी इस चुनौती का क्या जवाब देती है।