संजय राऊत ने अपनी नई किताब में विजय माल्या का बचाव करते हुए उन्हें धोखेबाज मानने पर सवाल उठाए।
राऊत ने दावा किया कि मोदी सरकार ने माल्या को देश छोड़ने पर मजबूर किया।
राऊत की 17वीं पुस्तक ‘बोध कीर्तन’ का विमोचन 31 अक्टूबर को मुंबई में होगा।
Vijay Mallya Controversy: शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और वरिष्ठ नेता संजय राऊत अपनी नई पुस्तक 'बोध कीर्तन' को लेकर चर्चा में हैं। पुस्तक में उन्होंने भगोड़े आर्थिक अपराधी विजय माल्या को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिसने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है।
राऊत ने माल्या को धोखेबाज मानने से इनकार करते हुए कहा है कि उन्हें भगोड़ा कहना भी उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने माल्या को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया।
पुस्तक के 'माल्या की कहानी' शीर्षक वाले अध्याय में राऊत ने लिखा है कि वह विजय माल्या को व्यक्तिगत रूप से जानते थे। संसद और सेंट्रल हॉल में हुई मुलाकातों का जिक्र करते हुए उन्होंने माल्या को मिलनसार, हंसमुख, उदार और देशप्रेमी व्यक्ति बताया है।
राऊत का दावा है कि माल्या की किसी को धोखा देने की नीयत नहीं थी। उनके मुताबिक, किंगफिशर एयरलाइंस का कारोबार डूबने और कर्ज का भुगतान अटकने के बाद बैंकों को माल्या की मदद करनी चाहिए थी। उन्होंने माल्या को भगोड़ा कहे जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
राऊत ने अपनी पुस्तक में आरोप लगाया है कि माल्या को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उनका कहना है कि कारोबारी संकट के बाद माल्या को जिस तरह से देखा गया, उस पर सवाल उठाए जाने चाहिए। हालांकि, ये राऊत के निजी विचार और पुस्तक में किए गए दावे हैं।
'बोध कीर्तन' में राऊत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गैर-राजनीतिक भाषणों की भी प्रशंसा की है। राजनीतिक रूप से मोदी सरकार की आलोचना करने वाले राऊत की ओर से प्रधानमंत्री के भाषणों की तारीफ किए जाने को भी पुस्तक का एक अलग पहलू माना जा रहा है।
संजय राऊत की 17वीं पुस्तक 'बोध कीर्तन' का विमोचन 31 अक्टूबर को मुंबई के दादर स्थित ब्राह्मण सहायक संघ में शाम 5 बजे होगा। कार्यक्रम में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे और वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अंबरीश मिश्र मौजूद रहेंगे। पुस्तक के कुछ अंश सामने आने के बाद अब इसके विमोचन और उसमें शामिल विचारों पर राजनीतिक तथा साहित्यिक हलकों की नजर रहेगी।