Sanjay Raut On Ashok Kharat Controversy (डिजाइन फोटो) 
मुंबई

खरात केस में 'सियासी' मोड़: पीड़ित महिलाओं के फोटो लीक होने पर भड़के राउत, बोले- 'गृह मंत्री को शर्म आनी चाहिए'

Sanjay Raut On Ashok Kharat: संजय राउत ने अशोक खरात केस में पीड़ितों की फोटो लीक होने पर गृह मंत्री को घेरा। खरात को भाजपा का प्रचारक बताते हुए 1.5 करोड़ के फंड पर सवाल उठाए।

अनिल सिंह

Sanjay Raut On Ashok Kharat Case Victims Photo Leak: महाराष्ट्र के नासिक में 'भोंदू बाबा' अशोक खरात के खिलाफ चल रही एसआईटी (SIT) जांच अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गई है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने राज्य सरकार और गृह विभाग पर तीखा हमला बोला है। राउत का आरोप है कि जांच के दौरान पीड़ित महिलाओं की पहचान और उनके फोटो सार्वजनिक किए जा रहे हैं, जो न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि पीड़ित महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ भी है।

राउत ने गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे निशाने पर लेते हुए इस पूरी घटना को "प्रशासनिक विफलता" करार दिया है।

संजय राउत का कड़ा प्रहार: "पहचान उजागर होना शर्मनाक"

मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की संस्कृति में हमेशा से पीड़ित महिलाओं की गोपनीयता का सम्मान किया गया है, लेकिन अशोक खरात मामले में पहली बार ऐसा देखा जा रहा है कि पीड़ितों के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "जब सभी साक्ष्य और मोबाइल फोन पुलिस की कस्टडी में हैं, तो ये फोटो बाहर कैसे आए? पुलिस विभाग देवेंद्र फडणवीस के पास है, उन्हें इस पर जवाब देना चाहिए और इस लापरवाही के लिए शर्म आनी चाहिए।"

खरात को बताया 'भाजपा का प्रचारक'

संजय राउत ने इस मामले को राजनीतिक रंग देते हुए दावा किया कि अशोक खरात भाजपा के लिए काम करता था। उन्होंने कहा, "खरात भाजपा का आधिकारिक प्रचारक था। भाजपा और संघ परिवार हमेशा से ऐसे बाबाओं को पालते रहे हैं ताकि उन्हें चुनावों में इस्तेमाल किया जा सके।" राउत ने 2018 के उस सरकारी आदेश (GR) का भी हवाला दिया जिसमें तत्कालीन युति सरकार ने खरात के मंदिर के लिए 1.5 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया था। उन्होंने मांग की कि इस 'पाप' में शामिल सभी चेहरों को बेनकाब किया जाना चाहिए।

तेजस्विनी सातपुते और निष्पक्ष जांच की मांग

राउत ने एसआईटी प्रमुख तेजस्विनी सातपुते से अपील की है कि वे न केवल अशोक खरात के अपराधों की जांच करें, बल्कि पुलिस विभाग के भीतर से डेटा लीक होने के मामले की भी गहराई से पड़ताल करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़ितों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में कोई भी महिला शिकायत लेकर सामने नहीं आएगी। दूसरी ओर, रूपाली चाकणकर के इस्तीफे के बाद अब विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहा है कि उन सभी नेताओं की जांच हो जिनके संबंध इस ढोंगी बाबा से रहे हैं।

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