रिजीम चेंज को लेकर संयज राउत का भाजपा पर तीखा हमला।
संजय राउत बोले सत्ता बदलना लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है।
संजय राउत ने कहा 2013-14 में भाजपा ने भी रिजीम चेंज के लिए आंदोलन किया था।
Sanjay Raut Attacks On BJP Regime Change: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सत्ता परिवर्तन और देश की न्यायपालिका को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में रिजीम चेंज कोई अपराध नहीं, बल्कि यह जनता और विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। इसके साथ ही उन्होंने अदालत की अवमानना से जुड़े अपने हालिया बयान पर भी स्थिति साफ करते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है।
भाजपा द्वारा विपक्ष पर सत्ता के भूखे होने का आरोप लगाए जाने पर पलटवार करते हुए शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा कि देखिए, सत्ता बदलने की बात करने में नया क्या है? जब भारतीय जनता पार्टी ने 2013, 2014 में आंदोलन किए थे, तो क्या वे कोई समाज सेवा कर रहे थे? वे भी तो सत्ता बदलना ही चाहते थे, है ना? हम भी सत्ता बदलने की दिशा में काम करेंगे। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्ता बदलना लोकतंत्र का ही एक हिस्सा है।
भाजपा और केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए संजय राउत ने कहा कि आपने गलत तरीके से और संविधान के खिलाफ काम किया है। आपने चुनाव आयोग का इस्तेमाल एक हथियार की तरह किया, ताकि आपकी सरकार सत्ता में आ सके। इस सरकार को खत्म किया जाना चाहिए।
न्यायपालिका से जुड़े एक बयान पर उठे विवाद पर बोलते हुए शिवसेना (UBT) सांसद ने कहा कि उनकी मंशा कभी भी अदालत का अनादर करने की नहीं रही। उन्होंने कहा कि हमारे देश में सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च है। जब सुप्रीम कोर्ट कोई फैसला सुनाता है, तो चाहे हम व्यक्तिगत रूप से उससे पूरी तरह सहमत हों या न हों, हम यही कहते हैं कि यह शीर्ष अदालत का निर्णय है और इसका सम्मान होना चाहिए।
संजय राउत ने आगे कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट को लगता है कि किसी बयान से अदालत की अवमानना हुई है, तो न्यायपालिका का सम्मान करना और आवश्यकता पड़ने पर माफी मांगना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है। हम जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग हैं।=
अपने पिछले बयान पर स्थिति स्पष्ट करते हुए उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने बताया कि जिस दावे के आधार पर उन्होंने टिप्पणी की थी, वह बाद में गलत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि उस समय किसी ने भी इस मामले की असलियत स्पष्ट नहीं की थी और न ही सही तथ्य सामने रखे थे। अगर हमें सही स्थिति पता होती, तो हम उस बयान को कभी दोहराते ही नहीं।