Sanjay Raut Alleges 15 Crore Bribe Shiv Sena UBT Split: महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसदों की संभावित बगावत को लेकर जारी घमासान अब बेहद निचले स्तर के आरोपों तक पहुंच गया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत द्वारा बागी सांसदों पर '15-15 करोड़ रुपये' लेने का सनसनीखेज आरोप लगाए जाने के बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। महाराष्ट्र सरकार में वरिष्ठ मंत्री और बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने राउत के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे जनप्रतिनिधियों को बदनाम करने की हताश कोशिश करार दिया है।
इस राजनीतिक वाकयुद्ध ने साफ कर दिया है कि 19 जून को होने वाले शिवसेना के स्थापना दिवस से ठीक पहले राज्य में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच शह-मात का खेल अपने चरम पर पहुंच चुका है।
संजय राउत के आरोपों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि जनता द्वारा चुने गए सांसदों और विधायकों पर इस तरह के बेबुनियाद और वित्तीय लेन-देन के आरोप लगाना पूरी तरह से अनुचित है। बावनकुले ने उद्धव ठाकरे गुट को नसीहत देते हुए कहा, "किसी भी जनप्रतिनिधित्व के अपना राजनीतिक दल या पक्ष बदलने के पीछे कई गंभीर वैचारिक और स्थानीय कारण हो सकते हैं। केवल पैसे का मुद्दा उठाकर अपने ही सहयोगियों को बदनाम करना सही नहीं है। ठाकरे गुट को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि आखिर वास्तविक वजह क्या है और उनके साथ इतने सालों से रहने वाले विधायक और सांसद उन्हें छोड़कर क्यों जा रहे हैं।"
इससे पहले, मुंबई में मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने एक बहुत बड़ा और विस्फोटक दावा किया था। राउत ने कहा था, "मेरे पास पुख्ता खुफिया जानकारी है कि बगावत की राह पर चल रहे हमारे सांसदों को 15-15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम पहुंचाई गई है। इस डील के पक्का होते ही ये सांसद नांदेड़, पुणे और एक अन्य गुप्त स्थान से विशेष चार्टर्ड विमानों के जरिए सीधे दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं।" राउत ने आगे कहा कि पार्टी इस पैसे के खेल के आगे झुकने वाली नहीं है और बागी सांसदों को कानूनी रूप से घेरने के लिए नई दिल्ली में होने वाली संसदीय दल की बैठक हेतु आधिकारिक 'व्हिप' जारी कर दिया गया है।
सांसदों के पाला बदलने की इस कानूनी लड़ाई को भांपते हुए शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजकर किसी भी संभावित बागी गुट को मान्यता न देने की अपील की है। महाविकास अघाड़ी के सूत्रों का कहना है कि दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी धड़े को कुल 9 में से कम से कम 6 सांसदों (दो-तिहाई बहुमत) का आंकड़ा हर हाल में दिखाना होगा। यदि बागी सांसद दिल्ली में यह संख्या बल साबित करने में नाकाम रहते हैं, तो व्हिप का उल्लंघन करने के आरोप में उनकी संसद सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।