Saamana Editorial Ashok Kharat (डिजाइन फोटो) 
मुंबई

'सामना' में प्रहार: खरात के दरबार में हाजिरी लगाते थे CM-DCM, अंधविश्वास को हिंदुत्व का नाम दे रही बीजेपी

Saamana Editorial Ashok Kharat: शिवसेना (UBT) ने 'सामना' के जरिए अशोक खरात मामले में सरकार को घेरा। लेख में आरोप लगाया गया कि बीजेपी राज में पाखंडी बाबाओं को राजनीतिक संरक्षण मिलता है।

अनिल सिंह

Saamana Editorial Ashok Kharat Case: नासिक के स्वयंभू ज्योतिषी अशोक खरात द्वारा महिलाओं के यौन शोषण का मामला अब महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े वैचारिक युद्ध में बदल गया है। शिवसेना (UBT) के मुखपत्र 'सामना' ने सोमवार (23 मार्च) के संपादकीय में राज्य सरकार पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के राज में पाखंडी बाबाओं को न केवल बढ़ावा दिया जाता है, बल्कि उन्हें कानूनी सुरक्षा (पैरोल) भी आसानी से मिल जाती है।

लेख में तंज कसते हुए कहा गया कि जिस महाराष्ट्र ने बहिणाबाई चौधरी जैसा जीवन दर्शन दिया, आज उसी राज्य का आधा मंत्रिमंडल पाखंड और तंत्र-मंत्र में लीन है।

खरात के 'दरबारी' बने सत्ता के रसूखदार?

संपादकीय में दावा किया गया है कि अशोक खरात कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष का 'राजज्योतिषी' बना बैठा था। लेख के अनुसार, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष तक उसके दरबार में हाजिरी लगाते थे। 'सामना' ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर सत्ता पक्ष के कई बड़े नेता खरात के प्रशंसकों में शामिल थे। लेख में सवाल उठाया गया कि यदि समय रहते इन 'प्रभावशाली भक्तों' ने अपनी आंखों से पट्टी हटाई होती, तो कई मासूम महिलाओं की आबरू बच सकती थी।

आसाराम और राम-रहीम का जिक्र: 'बीजेपी का महान कार्य'

उद्धव गुट ने बीजेपी पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए आसाराम बापू और राम-रहीम का उदाहरण दिया। लेख में लिखा गया, "आसाराम एक समय बीजेपी का सद्गुरु था। आज राम-रहीम जैसे अपराधियों को बार-बार पैरोल पर छोड़ने का 'महान कार्य' बीजेपी वाले ही कर रहे हैं।" संपादकीय के अनुसार, जब तक राजनीति में ऐसे बाबाओं का हस्तक्षेप रहेगा, तब तक समाज में अंधविश्वास का जहर फैलता रहेगा। लेख में साफ कहा गया कि केवल रूपाली चाकणकर का इस्तीफा लेकर इस मामले को दबाया नहीं जा सकता।

हिंदुत्व के नाम पर अंधविश्वास का खेल

'सामना' ने हिंदुत्व की अपनी परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा कि देश में आज अंधविश्वास को 'हिंदुत्व' का नाम देकर चलाया जा रहा है। लेख में चुनौती दी गई कि यदि ये ज्योतिषी और उनके राजनीतिक भक्त इतने ही शक्तिशाली हैं, तो वे अपनी तंत्रविद्या से बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि या पहलगाम जैसे आतंकवादी हमलों को क्यों नहीं रोक लेते?

सामना संपादकीय का सार यह था कि असली प्रगति मेहनत, आत्मविश्वास और विवेक से आती है, न कि पाखंडियों के चरणों में झुकने से। लेख ने चेतावनी दी है कि जो सत्ता पाखंड की नींव पर खड़ी होती है, उसका पतन निश्चित है।

Cooking Oil Price: सोयाबीन-पाम से सूरजमुखी तक तेल पर घटा कस्टम्स ड्यूटी, आज से लागू होंगे नए रेट

3 दशक निर्वासन भी नहीं तोड़ पाई आजादी का जुनून, कौन थी मैडम भीकाजी कामा जिन्होंने बनाया था भारत का पहला झंंडा

अंबानी को पछाड़ अडानी ने मारी बाजी, देश के अमीरों में 15 नए नाम शामिल, ये रही लिस्ट

Election Commission SIR Row: ECs में मतभेद का खुलासा, CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग, किसने क्या कहा?

Bank Strike: बैंक हड़ताल से पहले सरकार का बड़ा फैसला, 25 सितंबर को ही खाते में आएगी सैलरी-पेंशन