RSS Hindu Sammelan: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी स्थापना दिवस के अवसर पर 28 अक्टूबर तक देशभर में 1 लाख हिंदू सम्मेलन आयोजित करने का फैसला किया है। इस दौरान 15 करोड़ परिवारों से संपर्क कर देश की एकजुटता और भाईचारे की अलख जगाने का लक्ष्य रखा गया है।
आरएसएस के राष्ट्रीय संपर्क प्रमुख रामलाल ने बताया कि संघ किसी भी समुदाय का विरोधी नहीं है और इसका उद्देश्य केवल समाज और राष्ट्र के हित में काम करना है। उन्होंने कहा, “इसे समझना भाषण से नहीं, बल्कि हमारे कार्यक्रम में आकर देखना चाहिए। हमारा उद्देश्य भारत माता की जय बोलने की भावना को जागृत करना है।”
मुंबई के पवई नगर में आयोजित विजयादशमी उत्सव के अवसर पर रामलाल ने कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की प्रयोगशालाएं हैं। ये शाखाएं भाषा, प्रांत और जाति के भेदभाव से ऊपर उठकर लोगों को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समर्पण का पाठ पढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति ने हमारे महापुरुषों को जातियों में बांट दिया, लेकिन संघ का उद्देश्य केवल समाज और राष्ट्र की सेवा करना है।
रामलाल ने यह भी बताया कि संघ पर तीन बार पाबंदी लगाई गई, लेकिन स्वयंसेवकों के समर्पण और मेहनत से संघ आज यहां तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि संघ मुस्लिम और पारसी विरोधी नहीं है और उनका लक्ष्य किसी की पूजा पद्धति या धर्म का विरोध नहीं करना है।
इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का संदेश भी पढ़ा गया। भागवत ने कहा कि संघ मुसलमानों और ईसाइयों का विरोधी नहीं है और संगठन केवल हिंदू हित में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि “पूरा विश्व भारत माता की जय बोलेगा, तब हमारा उद्देश्य पूरा होगा।”
रामलाल ने विदेशी ताकतों की देश को तोड़ने की कोशिशों का जिक्र करते हुए कहा कि सभी नागरिकों को एकजुट होकर देशहित में काम करना होगा। संघ किसी दल या व्यक्ति के लिए काम नहीं करता, बल्कि समाज और राष्ट्र के हित में लगातार कार्य करता है।
आरएसएस के यह प्रयास न केवल संगठन की शताब्दी को यादगार बनाएंगे, बल्कि देश में सामाजिक समरसता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करेंगे।