Raj Thackeray Letter to PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईरान-इजराइल युद्ध और वैश्विक संकट का हवाला देते हुए भारतीयों से सोना न खरीदने, पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने और विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी। इस पर राज ठाकरे ने "क्रोनोलॉजी" समझाते हुए कहा कि यह केवल युद्ध का असर नहीं, बल्कि पिछले 10 वर्षों के गलत आर्थिक प्रबंधन का नतीजा है। राज ठाकरे ने लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए कहा कि शास्त्री जी ने त्याग की अपील करने से पहले खुद उसे अमल में लाया था, जबकि वर्तमान सरकार खुद फिजूलखर्ची में डूबी है।
राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि चुनावों के दौरान रोड शो और प्रचार में करोड़ों लीटर ईंधन जलाया जाता है, तब मितव्ययिता की याद क्यों नहीं आती? उन्होंने प्रधानमंत्री की 'रेवड़ी' वाली टिप्पणी पर तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र में 'लाडकी बहिन' जैसी योजनाओं के जरिए वोट खरीदे गए, जिससे राज्य की तिजोरी खाली हो गई। महिलाओं को मामूली रकम देकर महंगाई के जरिए उनसे दोगुना वसूला जा रहा है।
राज ठाकरे ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का मोहभंग हुआ है। लगभग 15 लाख करोड़ रुपये बाजार से बाहर जा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल ठंडे देशों में जाकर निवेश समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर करने का नाटक करती है, जबकि जमीनी स्तर पर निवेश नगण्य है। शिक्षा के बुनियादी ढांचे में सुधार के बजाय केवल भाषा थोपने पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे छात्र विदेशों की ओर पलायन कर रहे हैं।
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पत्र में राज ठाकरे ने याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले भी $100 के पार रही हैं, लेकिन तब ऐसी अपीलें नहीं की गई थीं। उन्होंने पूछा कि जब तेल की कीमतें कम थीं, तब जनता से वसूला गया टैक्स कहाँ खर्च हुआ? उन्होंने आशंका जताई कि सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी करने वाली है, इसलिए जनता को मानसिक रूप से तैयार करने के लिए ऐसी अपीलें की जा रही हैं।
अंत में, राज ठाकरे ने मांग की कि प्रधानमंत्री को केवल अपनी 'मन की बात' करने के बजाय असली अर्थशास्त्रियों की बात सुननी चाहिए। उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलाकर देश को अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति बताने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को मितव्ययिता की शुरुआत अपनी पार्टी और अपने सरकारी काफिलों से करनी चाहिए। यदि प्रधानमंत्री खुद त्याग करेंगे, तो देश की जनता भी उनका साथ देगी।