Priyanka Chaturvedi News: महिला आरक्षण कानून (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) को लेकर देश में चल रही सियासी खींचतान के बीच शिवसेना (UBT) की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आंकड़ों के जरिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। जहाँ भाजपा का दावा है कि वह महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की पक्षधर है, वहीं प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा शासित और अन्य प्रमुख राज्यों के चुनावी नतीजों का विश्लेषण कर यह साबित करने की कोशिश की है कि पार्टी के भीतर महिलाओं को टिकट देने और उन्हें सदन तक पहुँचाने की दर 33 फीसदी के लक्ष्य से काफी पीछे है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के विधानसभा चुनावों के आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि भाजपा में महिला विधायकों का प्रतिशत अभी भी दहाई के आंकड़े के आसपास संघर्ष कर रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि जो पार्टी आरक्षण का श्रेय ले रही है, उसने अपने संगठनात्मक ढांचे और टिकट वितरण में महिलाओं को उचित अवसर क्यों नहीं दिए?
प्रियंका चतुर्वेदी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, भाजपा के गढ़ माने जाने वाले राज्यों में भी महिलाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है:
उत्तर प्रदेश (2022): 403 सीटों में से केवल 47 महिलाएं विधायक बनीं (11.60%)।
गुजरात (2022): 182 सीटों में से केवल 15 महिलाएं चुनी गईं (8.20%)।
राजस्थान (2023): 200 सीटों में से केवल 20 महिलाएं जीतकर आईं (10%)।
महाराष्ट्र (2024): 288 सीटों में से केवल 21 महिलाएं विधायक बनीं (7.3%)।
असम (2021): यहाँ स्थिति सबसे खराब रही, जहाँ 126 सीटों पर मात्र 6 महिलाएं चुनी गईं (4.8%)।
हालांकि, छत्तीसगढ़ (2023) एक अपवाद नजर आया जहाँ 21 फीसदी महिला प्रतिनिधित्व रहा, लेकिन बिहार (2025) में यह फिर गिरकर 11.9 फीसदी पर आ गया।
ये भी पढ़ें- सूरत पलायन पर भड़के संजय राउत, ‘गुजरात मॉडल पर किया प्रहार, नरेंद्र मोदी और अमित शाह से मांगा जवाब
इन आंकड़ों को साझा करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने तंज कसा कि ये केवल चुनी हुई महिला सदस्य हैं, लेकिन अगर टिकट वितरण और अवसरों की बात की जाए, तो भाजपा 33 फीसदी के आसपास भी नहीं फटकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण की बातें केवल चुनावी जुमला बनकर रह गई हैं, जबकि धरातल पर महिलाओं को अभी भी पुरुषों के मुकाबले बहुत कम अवसर मिल रहे हैं।
विपक्ष का तर्क है कि जब महिला आरक्षण बिल 2023 में ही संसद से पास हो चुका है और 16 अप्रैल 2026 से इसे तकनीकी रूप से प्रभावी माना जा रहा है, तो फिर भाजपा इसका क्रियान्वयन करने में देरी क्यों कर रही है? प्रियंका चतुर्वेदी के इन आंकड़ों ने भाजपा की 'महिला समर्थक' छवि को चुनौती दी है और यह बहस छेड़ दी है कि क्या आगामी चुनावों में पार्टियां स्वेच्छा से 33 फीसदी टिकट महिलाओं को देंगी या फिर केवल कानून के लागू होने का इंतजार करेंगी।