Pratap Sarnaik On Akhilesh Yadav Statement: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की टिप्पणी पर महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने पलटवार करते हुए कहा कि मराठी भाषा और महाराष्ट्र की पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट के जरिए महाराष्ट्र में यूपी और बिहार के ऑटो-रिक्शा चालकों को मराठी सीखने में आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एक तरफ रोजगार उपलब्ध नहीं करा रही है और दूसरी ओर अपनी मेहनत से रोजी-रोटी कमाने वालों पर भी दबाव बनाया जा रहा है।
अखिलेश ने यह सवाल भी उठाया कि कहीं इस व्यवस्था के पीछे कमीशनखोरी का खेल तो नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि बड़ी वाहन कंपनियां ऑटो-रिक्शा जैसी आम जनता की सवारी को खत्म कर लोगों को महंगी गाड़ियों की ओर धकेलना चाहती हों।
अखिलेश के आरोपों पर जवाब देते हुए प्रताप सरनाईक ने कहा कि मुंबई, ठाणे और पूरे महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में गैर-मराठी लोग काम कर रहे हैं और राज्य उनका स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा किए होते, तो लोगों को रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र आने की जरूरत क्यों पड़ती।
सरनाईक ने कहा कि महायुति सरकार महाराष्ट्र में रोजगार पैदा करने के लिए काम कर रही है और वह रोजगार देने वाली सरकार है, रोजगार छीनने वाली नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र आने वाले लोगों में केवल उत्तर प्रदेश और बिहार के ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे राज्यों के लोग भी शामिल हैं।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने यह भी कहा कि मराठी भाषा और महाराष्ट्र की पहचान को लेकर राज्य का अपना गौरव है। उनके मुताबिक, हर राज्य की अपनी भाषा और संस्कृति होती है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा से जुड़ी व्यवस्था को असंवैधानिक बताना उचित नहीं है।
इस विवाद ने रोजगार, प्रवास, क्षेत्रीय भाषा और स्थानीय पहचान जैसे मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।