अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन के प्रबंध अदाणी अपने परिवार के साथ सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

चिंचपोकली चा चिंतामणि के दरबार पहुंचे प्रणव और करण अदाणी, सपरिवार किए बप्पा के भव्य दर्शन

Chinchpokli Sarvajanik Utsav Mandal: गणेश चतुर्थी के अवसर पर अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी और करण अदाणी ने मुंबई के प्रसिद्ध चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। 

प्रमोद यादव

Pranav Adani Karan Adani Chinchpoklicha Chintamani: गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी और अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने अपने परिवार के साथ मुंबई के प्रसिद्ध चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। 

इस अवसर पर प्रणव अदाणी ने कहा कि चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल के साथ जुड़ना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुके चिंचपोकली चा चिंतामणि की समृद्ध विरासत भक्ति, एकता और मुंबई की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक रही है।

मुंबई का दूसरा सबसे उत्सव मंडल

मुंबई का दूसरा सबसे प्राचीन सार्वजनिक उत्सव मंडल चिंचपोकली चा चिंतामणि 107 वर्षों की समृद्ध परंपरा का वाहक है। इस मंडल की जड़ें मुंबई के ऐतिहासिक मिल क्षेत्रों जैसे परेल, गिरगांव और लालबाग से जुड़ी हैं।

यह उत्सव लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की उस विरासत को आगे बढ़ाता है, जिन्होंने 1890 के दशक में गणेश चतुर्थी को घरों तक सीमित धार्मिक आयोजन से सार्वजनिक उत्सव का स्वरूप दिया था।

हर वर्ष की तरह इस बार भी मंडल ने विशेष थीम पर आधारित भव्य सजावट की है। इस वर्ष का आयोजन दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला की भव्यता से प्रेरित है। गणेश प्रतिमा को तिरुमला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की थीम पर सजाया गया है। इसमें गरुड़, शंख, चक्र, कीर्तिमुख और कपूर तिलक जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को शामिल किया गया है।

वहीं, विशाल पंडाल को हैदराबाद और भुवनगिरि स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर (स्वर्णगिरि) की स्थापत्य शैली के अनुरूप तैयार किया गया है। ऊंचे गोपुरम, दीपस्तंभ और याली-व्याल जैसे पारंपरिक संरक्षक प्रतीक इसकी मुख्य विशेषताएं हैं।

1982 की ऐतिहासिक मिल हड़ताल

मुंबई जिले के प्रसिद्ध चिंचपोकली चा चिंतामणि उत्सव की शुरुआत में मिल मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। 1982 की ऐतिहासिक मिल हड़ताल और उसके बाद शहर में हुए बड़े बदलावों के बावजूद यह मंडल स्थानीय समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

करीब 5,000 सदस्यों और सहयोगियों के साथ चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल केवल गणेशोत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान देता है। वर्ष 1939 से यह उत्सव चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से के समीप आयोजित किया जा रहा है।

मंडल समय-समय पर रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और बच्चों के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी मंडल ने सार्वजनिक उत्सवों को सीमित रखते हुए स्वास्थ्य जांच शिविर, चिकित्सकीय सहायता और रक्तदान अभियानों जैसे जनसेवा कार्यों को प्राथमिकता दी थी।

-एजेंसी इनपुट से

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