Facility Centre In Mumbai: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री तथा उत्तर मुंबई के सांसद पीयूष गोयल ने दहिसर पूर्व के सावरपाड़ा में नए ‘सुविधा केंद्र’ का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर उत्तर मुंबई में ऐसे 100 केंद्र बनाए जा सकते हैं, ताकि क्षेत्र के हर व्यक्ति को स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल, स्नान और लॉन्ड्री जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
गोयल ने केंद्र का उद्घाटन वर्चुअल माध्यम से करते हुए कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधुनिक और स्वच्छ जन-सुविधाएं उपलब्ध कराने के विजन से प्रेरित है।
उन्होंने प्रधानमंत्री के 2014 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि खुले में शौच की समस्या को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने के बाद देश में स्वच्छता के प्रति सोच में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने कहा कि इसके बाद देश में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है।
सावरपाड़ा स्थित सुविधा केंद्र पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से बनाया गया है। इसमें हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड, एचएसबीसी इंडिया, जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन और बृहन्मुंबई महानगरपालिका की भागीदारी है।
केंद्र में 29 टॉयलेट सीट, छह लॉन्ड्री मशीनें और जल शुद्धिकरण की सुविधा उपलब्ध है। पांच सदस्यों वाले परिवार के लिए 150 रुपये मासिक शुल्क में असीमित शौचालय उपयोग की सुविधा दी जाएगी। आरओ-फिल्टर्ड पानी एक रुपये प्रति लीटर और सात किलो कपड़ों की लॉन्ड्री 70 रुपये में उपलब्ध होगी।
केंद्र को टिकाऊ डिजाइन के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें ग्रीन स्टील, ग्रीन सीमेंट, रूफटॉप सोलर और ग्रेवॉटर रिसाइक्लिंग जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। बाढ़ से सुरक्षा के लिए इसे जमीन से तीन फीट ऊंचा बनाया गया है।
गोयल ने ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री द्वारा उल्लेखित रामपुर के पटवाई गांव का उदाहरण देते हुए युवाओं से अपने क्षेत्रों की सफाई के लिए टीमें बनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि उत्तर मुंबई में 9 तालाबों की सफाई और सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले से संचालित सुविधा केंद्र का प्रतिदिन 1,500 से अधिक लोग उपयोग कर रहे हैं और स्थानीय लोग, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूह, इसके संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नया केंद्र भी 24 घंटे संचालित होगा। पीयूष गोयल ने कहा, 'उत्तर मुंबई के हर व्यक्ति को ऐसी सुविधा मिलनी चाहिए।'