नवी मुंबई मीठी नदी, प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

नवी मुंबई में मीठी नदी की गाद पर घमासान, बिना चर्चा ₹1.5 करोड़ का प्रस्ताव पास; विपक्ष ने खोला मोर्चा

NMMC Mithi River: मुंबई की मीठी नदी की गाद को नवी मुंबई में डंप करने के बाद अब उसे हटाने के लिए मनपा द्वारा 1.5 करोड़ का फंड मंजूर करने पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है।

रूपम सिंह

Navi Mumbai Municipal Corporation: मुंबई की मीठी नदी की सफाई के दौरान निकली गाद और मलबे को नवी मुंबई के एमआईडीसी क्षेत्र में सिडको की खाली पड़ी जमीन पर डंप किया गया था। अब इस गाद को वहां से हटाने की जिम्मेदारी नवी मुंबई महानगरपालिका (मनपा) द्वारा उठाई जा रही है। इसके लिए मनपा करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में है।

बिना चर्चा प्रस्ताव पास होने पर सवाल

मिली जानकारी के अनुसार, गाद और मलबा हटाने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव मनपा की स्थायी समिति की बैठक में बिना किसी विस्तृत चर्चा के मंजूर कर दिया गया। प्रस्ताव पारित होने के बाद स्थायी समिति के कामकाज और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहले डंपिंग की अनुमति क्यों दी गई?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मीठी नदी की सफाई के बाद बड़ी मात्रा में गाद निकलनी थी, तो उसके निपटारे की उचित व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई? यदि गाद को डंप करने के लिए अधिकृत व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी, तो एमआईडीसी क्षेत्र में सिडको की खाली जमीन पर इसे डालने की अनुमति किसने दी?

विरोधी पक्ष ने इसी मुद्दे को लेकर नवी मुंबई मनपा प्रशासन के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। विपक्ष का सवाल है कि जिस मलबे को हटाने के लिए अब सार्वजनिक धन से बड़ी राशि खर्च की जा रही है, उसके डंपिंग और बाद में हटाने की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई।

सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर बहस

विरोध के बावजूद प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मनपा की योजना और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि गाद के निपटारे की समुचित योजना पहले बनाई जाती, तो उसे दोबारा हटाने के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च करने की नौबत नहीं आती।

अब इस मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि सिडको की जमीन पर गाद डंप करने की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी और उसे हटाने का खर्च नवी मुंबई मनपा के जिम्मे क्यों आया। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पूरे मामले की जिम्मेदारी और निर्णय प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी।

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