house adjournment controvers (सोर्सः सोशल मीडिया) 
मुंबई

विधान भवन की कार्यवाही पर उठे सवाल, जानबूझकर भी स्थगित होते हैं सदन: नीलम गोर्हे का सनसनीखेज दावा

Neelam Gorhe statement: नीलम गोर्हे ने दावा किया कि कई बार सत्तापक्ष और विपक्ष की सहमति से सदन की कार्यवाही जानबूझकर स्थगित कराई जाती है, जिससे राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

आंचल लोखंडे

Maharashtra Assembly News: विधानमंडल के सदनों में होने वाला हंगामा और उसके बाद कार्यवाही स्थगित होना आम बात मानी जाती है, लेकिन क्या यह सब पहले से तय होता है? विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे ने नाशिक में आयोजित विश्व मराठी सम्मेलन में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि कई बार सत्तापक्ष और विपक्ष आपसी सहमति से जानबूझकर सदन की कार्यवाही स्थगित करवाते हैं।

गोर्हे ने कहा कि विपक्ष का धर्म है सवाल उठाना और सत्तापक्ष का कर्तव्य उसका जवाब देना, लेकिन कई बार इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक “गुप्त समझौता” काम करता है। उनके अनुसार, कई मौकों पर सुबह सदन शुरू होने से पहले ही तय हो जाता है कि विपक्ष कितनी देर तक हंगामा करेगा और किस समय सदन स्थगित किया जाएगा। यहां तक कि वॉकआउट का समय भी पूर्व निर्धारित होता है।

माफी के बाद निलंबन में राहत

उपसभापति ने आगे बताया कि जब कोई विधायक अभद्र भाषा का प्रयोग करता है, तो नियमों के तहत उसे निलंबित करना पड़ता है। हालांकि, कई मामलों में निलंबित सदस्य सभापति से मिलकर माफी मांग लेते हैं, जिसके बाद उनका निलंबन सात दिनों के बजाय तीन दिन में ही समाप्त कर दिया जाता है।

गोपनीय समझौते का किया खुलासा

उन्होंने यह भी कहा कि सदन के भीतर सदस्य आपस में जो बातचीत करते हैं, उसे पीठासीन अधिकारी स्पष्ट रूप से सुन सकते हैं। गोर्हे के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या सदन की कार्यवाही वास्तव में लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप चल रही है या फिर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।

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