Bombay High Court Show-Cause Notice To Forest Minister Ganesh Naik: नवी मुंबई एमआईडीसी के कीमती औद्योगिक भूखंड का नियम के विरुद्ध इस्तेमाल कर उस पर राजनीतिक पार्टी का कार्यालय बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए दाखिल की गई जनहित याचिका पर मुंबई उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने वन मंत्री गणेश नाईक और उनके पुत्र पूर्व विधायक संदीप नाईक के साथ एमआईडीसी प्रशासन और राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
मुख्य न्यायमूर्ती महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ती अद्वैत एम. शेठना की खंडपीठ ने इस मामले के मुद्दों को विचारणीय बताते हुए सभी प्रतिवादियों को 2 सप्ताह में अपना स्पष्टीकरण हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस हाईवोल्टेज मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी।
नवी मुंबई के खैरणे एमआईडीसी (महापे) स्थित भूखंड क्र. ए-14 और ए-15 इन औद्योगिक भूखंडों का मूल उद्देश्य ताक पर रखकर राजनीतिक पार्टी कार्यालयों और गैर-औद्योगिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने का दावा याचिकाकर्ता बालासाहेब मिरजे ने उच्च न्यायालय में दाखिल की गई जनहित याचिका (पीआईएल नं. 17 ऑफ 2026) में किया है।
याचिकाकर्ता के वकील एड, संदीप कर्णिक और एड. दर्श गाला ने खंडपीठ के समक्ष पक्ष रखते हुए एमआईडीसी के नियमों की खुलेआम कैसे धज्जियां उड़ाए जाने को लेकर अदालत का ध्यान आकर्षित किया।
बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए इस नोटिस में राज्य शासन के साथ एमआईडीसी के प्रादेशिक अधिकारी (महापे), एमआईडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मेसर्स ग्रीनस्केप डेवलपर्स प्रा. लि. (भूखंड ए-14), सार्थ इन्फोटेक के प्रोप्रायटर संदीप नाईक (भूखंड ए-15) और निशांत फूड प्रा. लि. के संचालक गणेश नाईक को सीधे तौर पर प्रतिवादी बनाया गया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त सरकारी वकील केदार दिघे ने कोर्ट का नोटिस स्वीकार कर लिया है, वहीं अन्य लोगों को कानूनी नोटिस भेजे गए हैं।
प्रशासन द्वारा दिए गए इस भूखंड का नियमानुसार 66 इस्तेमाल नहीं होगा तो यह भूखंड प्रशासन को तत्काल अपने कब्जे में लेना चाहिए और उस पर नए उद्योग-धंधे खड़े करने चाहिए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सके।बालासाहेब मिरजे, याचिकाकर्ता
अदालत ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह की मोहलत दी है, और उसके बाद याचिकाकर्ता को एक सप्ताह में अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने का आदेश दिया है।
औद्योगिक विकास को गति देने और बेरोजगारी दूर करने के लिए आरक्षित रखी गई एमआईडीसी की जमीनों पर राजनीतिक सत्ता केंद्र बनाए जाने की इस सीधी कानूनी चुनौती से नवी मुंबई के राजनीतिक और औद्योगिक हलकों में भारी खलबली मच गई है। अब 8 अक्टूबर की सुनवाई में नाईक परिवार और एमआईडीसी प्रशासन अदालत में क्या जवाब पेश करता है, इस तरफ पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई है।
एमआईडीसी भूखंड के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर लगे इन गंभीर आरोपों और उच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस के बाद वन मंत्री गणेश नाईक व पूर्व विधायक संदीप नाईक का आधिकारिक पक्ष जानने के लिए जब नवभारत ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो वह नहीं हो सका।