फ्लेमिंगो बर्डस (सोर्स: फाइल फोटो)
मुंबई

फ्लेमिंगो सिटी की पहचान पर संकट, नवी मुंबई से क्यों रूठ रहे हैं विदेशी मेहमान? क्या इस बार कम आएँगे पक्षी?

Navi Mumbai Flamingo Migration: नवी मुंबई की खाड़ियों में प्रदूषण, अतिक्रमण और भोजन की उपलब्धता से जुड़ी चिंताओं के बीच इस बार फ्लेमिंगो की संख्या घटने की आशंका है। इनका आगमन नवंबर में हो सकता है।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आलोक उमाकृष्ण

Highlights

  • प्रवासी फ्लेमिंगो नवंबर के मध्य से अंत तक नवी मुंबई पहुंच सकते हैं।

  • अनुमान के मुताबिक, इनकी संख्या फरवरी में सबसे अधिक हो सकती है और पक्षी जून-जुलाई तक ठहर सकते हैं।

  • खाड़ियों की जल गुणवत्ता की निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।

Flamingo Migration Pollution Habitat Threat: लाखों फ्लेमिंगो की मौजूदगी से गुलजार रहने वाली नवी मुंबई की पहचान अब संकट में नजर आ रही है। देश-विदेश के पक्षी प्रेमियों को आकर्षित करने वाले ये खूबसूरत प्रवासी पक्षी शहर की खाड़ियों और आर्द्रभूमियों में बड़ी संख्या में पहुंचते रहे हैं। लेकिन अब उन साइबेरियन पक्षियों के आगमन और ठहराव को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

तेजी से बढ़ रहा प्रदूषण

पर्यावरणविदों के अनुसार मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे से सटे समुद्री खाड़ी किनारों पर तेजी से प्रदूषण एवं अतिक्रमण बढ़ रहा है।

खाड़ी किनारे बढ़ता प्रदूषण, प्राकृतिक आवास में बदलाव और भोजन की उपलब्धता से जुड़ी समस्याएं फ्लेमिंगो के लिए चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मुंबई, नवी मुंबई इन विदेशी मेहमानों के स्वागत और संरक्षण के लिए पूरी तरह तैयार है?

भोजन की कमी से प्रभावित हो सकता है प्रवास

बताया जा रहा है कि इस बार मौसम में बदलाव के चलते दिसंबर की बजाय नवंबर महीने में ही विदेशी मेहमानों का आगमन हो सकता है। यहां फ्लेमिंगो के लिए खाड़ी और आर्द्रभूमियां केवल विश्राम स्थल नहीं, बल्कि भोजन के प्रमुख स्रोत भी हैं।

यहां उपलब्ध शैवाल, सूक्ष्म जीव और अन्य खाद्य संसाधन उनके जीवनचक्र में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि प्रदूषण, जल की गुणवत्ता में गिरावट या प्राकृतिक परिस्थितियों में बदलाव के कारण भोजन की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो इन पक्षियों के ठहरने और भोजन करने के व्यवहार पर काफी असर पड़ सकता है।

फ्लेमिंगो का प्राकृतिक आवास संकट में

नवी मुंबई की खाड़ियों और आर्द्रभूमियों पर शहरीकरण, कचरे तथा प्रदूषण का दबाव पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीर चिंता का विषय है। प्राकृतिक आवासों का क्षरण न केवल फ्लेमिंगो, बल्कि कई अन्य प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के अस्तित्व को भी प्रभावित कर सकता है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो फ्लेमिंगो सिटी के रूप में शहर की पहचान कमजोर पड़ने का खतरा है।

संरक्षण के लिए ठोस कदम जरूरी

फ्लेमिंगो के संरक्षण के लिए खाड़ियों में प्रदूषण पर नियंत्रण, नियमित जल गुणवत्ता जांच, खाद्य संसाधनों और पक्षियों की संख्या की वैज्ञानिक निगरानी तथा संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा जरूरी है। फ्लेमिंगो केवल नवी मुंबई की प्राकृतिक सुंदरता नहीं, बल्कि यहां के पारिस्थितिक संतुलन के भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इनकी मौजूदगी शहर की पर्यावरणीय विरासत बचाने का काम करती है। प्रवासी राजहंस नवंबर के मध्य से अंत तक पहुंच सकते हैं। पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण इस बार इनकी आमद पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम होने की संभावना जताई जा रही है।

पिछले वर्ष पश्चिमी तट पर अच्छी बारिश के कारण फ्लेमिंगो का आगमन जनवरी में शुरू हुआ था। इस बार मानसून की कमी के चलते इनके नवंबर में ही पहुंचने की संभावना है। अनुमान है कि फरवरी 2027 तक इनकी संख्या चरम पर पहुंच सकती है और ये पक्षी जून-जुलाई तक इस क्षेत्र में रह सकते हैं।

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