Mumbai Rain Accidents and 10 Deaths: आर्थिक राजधानी मुंबई में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश अब मुंबईकरों के लिए काल साबित हो रही है। महानगर में 28 जून से शुरू हुआ भारी बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसने अब एक बेहद भयावह रूप अख्तियार कर लिया है। पिछले 6 दिनों के भीतर ही मुंबई के अलग-अलग इलाकों में हुए हादसों में 10 से ज्यादा मासूम नागरिकों की जान जा चुकी है।
मुंबई में कहीं सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं, कहीं विशालकाय पेड़ धराशायी हो रहे हैं, तो कहीं जानलेवा खुले मैनहोल्स और धंसती सड़कें लोगों को लील रही हैं। सोमवार (6 जुलाई 2026) की तड़के मानखुर्द इलाके में हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है, जिसके बाद मानसून पूर्व तैयारियों का ढिंढोरा पीटने वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका के दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
मुंबई के पूर्वी उपनगर मानखुर्द से सोमवार तड़के एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई। यहां लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण एक पुरानी चाल के मकान का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया। हादसा सुबह के समय हुआ जब लोग गहरी नींद में थे। मलबे में दबने के कारण करीब 6 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
स्थानीय लोगों और दमकल विभाग की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया है, जहां कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। इस हादसे ने मुंबई के असुरक्षित निर्माणों और मानसून में उनकी री-स्ट्रक्चरिंग की बीएमसी की नीति को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
ये भी पढ़ें- मुंबई में बड़ा हादसा; मानखुर्द में 3 मंजिला चॉल ढहने से 6 लोगों की मौत, मलबे में कई लोगों के फंसने की आशंका
महानगर में हादसों की यह फेहरिस्त बहुत लंबी और परेशान करने वाली है। इससे पहले 30 जून को मुंबई के चेंबूर इलाके में एक चलती स्कूल बस पर एक भारी-भरकम पेड़ गिर गया था। इस भीषण हादसे में बस में सवार 5 से अधिक बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि 11 साल की एक मासूम छात्र की इलाज के दौरान मौत हो गई।
इसके ठीक दो दिन बाद,2 जुलाई को साकीनाका इलाके में सड़क पर पानी भरे होने के कारण बीएमसी की लापरवाही से खुला रह गया एक मैनहोल दिखाई नहीं दिया, जिसमें गिरने से 60 वर्षीय बुजुर्ग असलम इसाक शेख की डूबने से मौत हो गई। इन दोनों ही घटनाओं ने मुंबई के आम नागरिकों के भीतर घर से बाहर निकलने को लेकर एक खौफ पैदा कर दिया है।
मानसून की एंट्री से पहले बीएमसी प्रशासन ने दावा किया था कि नालों की सफाई, मैनहोल्स पर सुरक्षा जाली लगाने और कमजोर पेड़ों की छंटाई का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। लेकिन धरातल पर बीएमसी की यह व्यवस्था पूरी तरह विफल और असहाय नजर आ रही है। सड़कों पर उभरे बड़े-बड़े गड्ढे और धंसते रास्ते रोज नई दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहे हैं।
दूसरी तरफ, इस मानवीय त्रासदी के बीच भी राजनीतिक दल और नेता अपनी रोटियां सेकने से बाज नहीं आ रहे हैं। हादसों के बाद विपक्षी नेता इसे बीएमसी और सत्ताधारियों की लापरवाही बताकर बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वक्त रहते किसी भी दल के जनप्रतिनिधि ने बीएमसी प्रशासन की फाइलों और जमीनी तैयारियों की समीक्षा करने के लिए कोई ठोस सवाल नहीं उठाया था। नतीजा यह है कि आज मुंबई का आम टैक्सपेयर प्रशासनिक अनदेखी और राजनीतिक उदासीनता की कीमत अपनी जान देकर चुका रहा है।