मुंबई महानगर क्षेत्र में वायु प्रदूषण घटाने के लिए स्वच्छ हवा कार्य योजना बनेगी।
सड़कों की वैक्यूम सफाई, मलबे की ढुलाई पर सख्ती और उद्योगों की जांच होगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों, हरित क्षेत्रों और पर्यावरण अनुकूल निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर।
Mumbai MMR Clean Air Action Plan Pankaja Munde: मुंबई महानगर प्रदेश में वायु प्रदूषण कम करने के लिए स्वच्छ हवा कार्य योजना तैयार की जाएगी। इसके तहत सड़कों की धूल, निर्माण मलबे, वाहनों के धुएं और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए संयुक्त अभियान चलाया जाएगा। पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने गुरुवार को संबंधित विभागों और महानगरपालिकाओं के अधिकारियों के साथ बैठक में इस संबंध में निर्देश दिए।
पंकजा मुंडे ने कहा कि केवल झाड़ू लगाने से सड़कों की धूल से होने वाले प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जा सकता। इसके लिए वैक्यूम क्लीनिंग मशीनों के इस्तेमाल और स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव करने पर जोर दिया जाएगा। पानी के छिड़काव में शोधित गंदे पानी के इस्तेमाल की संभावना भी तलाशी जाएगी।
स्कूल-कॉलेज के मैदानों और अन्य खुली जगहों पर धूल कम करने के लिए भी जरूरी उपाय किए जाएंगे। इसका उद्देश्य धूल के कणों को हवा में फैलने से रोकना और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण करना है।
निर्माण मलबा ले जाने वाले वाहनों को पूरी तरह ढकना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को आवश्यक सुधार किए बिना आगे जाने की अनुमति नहीं देने के निर्देश यातायात पुलिस को दिए गए हैं।
मलबे के संग्रह, निपटान, प्रसंस्करण और पुनः उपयोग के लिए साझा व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है। इस संबंध में 15 से 20 दिनों के भीतर दिशानिर्देश तैयार करने का प्रयास होगा। बैठक में मलबा डालने के लिए पर्याप्त स्थानों की कमी, अवैध ढुलाई और खारफुटी क्षेत्रों में मलबा फेंकने जैसी समस्याओं पर भी चर्चा हुई।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल को औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच करने और पर्यावरण संबंधी नियमों के पालन की पुष्टि करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया गया।
बैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने के साथ स्वच्छ हवा कार्यक्रम के तहत मंजूर निधि के उपयोग की भी समीक्षा की गई। राजमार्गों पर उड़ने वाली धूल और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
वायु प्रदूषण कम करने के लिए इमारतों की छतों पर उद्यान विकसित करने, पर्यावरण अनुकूल निर्माण पद्धतियां अपनाने और शहरी हरित क्षेत्रों को बढ़ावा देने के विकल्पों का तकनीकी अध्ययन किया जाएगा।
पर्यावरण मंत्री ने संबंधित विभागों और मुंबई महानगरपालिकाओं को आपसी समन्वय से कार्य योजना लागू करने और नियमित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। योजना की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि धूल नियंत्रण, मलबा प्रबंधन और औद्योगिक प्रदूषण पर रोक लगाने के उपाय जमीन पर कितनी प्रभावी तरह से लागू होते हैं।