मनोरी खारा पानी शुद्धिकरण परियोजना, प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

मुंबई की मनोरी खारा पानी शुद्धिकरण परियोजना के खिलाफ मछुआरों का हल्लाबोल, 19 अक्टूबर को बांद्रा में मोर्चा

Mumbai Fishermen Protest: मुंबई की मनोरी खारा पानी शुद्धिकरण परियोजना के विरोध में अखिल महाराष्ट्र मछुआरा एक्शन कमेटी 19 अक्टूबर को बांद्रा कलेक्टर कार्यालय पर विशाल जनआक्रोश मोर्चा निकालेगी।

रूपम सिंह

Highlights

  • मनोरी समुद्री जल शुद्धिकरण परियोजना के विरोध में 19 अक्टूबर को मोर्चा।

  • ₹3,462 करोड़ की परियोजना से समुद्री पर्यावरण और मछुआरों पर असर की आशंका।

  • मनोरी-गोराई बंद रखने का फैसला; पानी का रिसाव रोकने की मांग।

Manori Desalination Project: मुंबई की मनोरी खारा पानी शुद्धिकरण परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। अखिल महाराष्ट्र मछुआरा एक्शन कमेटी और अन्य संगठनों ने परियोजना को रद्द करने की मांग करते हुए 19 अक्टूबर को बांद्रा स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पर जनआक्रोश मोर्चा निकालने की घोषणा की है।

संगठनों ने विरोध के तहत मनोरी और गोराई क्षेत्र बंद रखने का भी ऐलान किया है। यह जानकारी कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र दामोदर तांडेल ने दी।

रोजाना 500 मिलियन लीटर समुद्री पानी लेने की योजना

मुंबई शहर के मनोरी खारा पानी शुद्धिकरण परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुसार, संयंत्र में प्रतिदिन 500 मिलियन लीटर समुद्री पानी लिया जाएगा। इसमें से 200 मिलियन लीटर पीने योग्य पानी तैयार करने और शेष 300 मिलियन लीटर खारे पानी को वापस समुद्र में छोड़ने की योजना है।

मछुआरा संगठनों ने आशंका जताई है कि समुद्र में खारे पानी की वापसी से जलीय पर्यावरण और मत्स्य संपदा प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि परियोजना से स्थानीय मछुआरा समुदाय की आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, पर्यावरणीय प्रभाव की वास्तविक सीमा का आकलन संबंधित वैज्ञानिक और आधिकारिक अध्ययनों से ही स्पष्ट होगा।

3,462 करोड़ रुपये की लागत पर उठाए सवाल

कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बर्नार्ड डिमेलो के मुताबिक, परियोजना की शुरुआती लागत 3,462 करोड़ रुपये और सालाना बिजली खर्च लगभग 147 करोड़ रुपये बताया गया है। संगठनों का तर्क है कि इस खर्च का बोझ अंततः जनता पर पड़ेगा। उन्होंने नगर विकास मंत्री से परियोजना को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

पानी के रिसाव को रोकने की मांग

  • मछुआरा संगठनों का कहना है कि समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने पर बड़ी राशि खर्च करने से पहले मुंबई की जल वितरण प्रणाली में होने वाले रिसाव को रोकने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके दावे के अनुसार, वितरण के दौरान लगभग 38 प्रतिशत यानी 1,445 मिलियन लीटर पानी का रिसाव होता है।

  • संगठनों का दावा है कि यदि रिसाव को घटाकर 15 प्रतिशत तक लाया जाए, तो करीब 875 मिलियन लीटर पानी बचाया जा सकता है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

  • कमेटी ने कहा कि 19 अक्टूबर के मोर्चे में कोली समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे। संगठनों ने स्पष्ट किया है कि परियोजना रद्द करने की मांग पूरी होने तक उनका विरोध जारी रहेगा।

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