Mumbai Mahul Nala Floating Waste: वडाला स्थित माहुल नाले से वर्षों तक गंदे पानी के साथ कई टन तैरता कचरा बहकर अंततः अरब सागर में पहुंचता रहा है। लेकिन इस सप्ताह इस उपेक्षित नाले में एक अनोखा हस्तक्षेप देखने को मिला।
क्रेन और तैरते प्लेटफॉर्म की मदद से बीएमसी कर्मचारियों ने 57 मीटर लंबा फ्लोटिंग वेस्ट बैरियर स्थापित किया, जिसका उद्देश्य प्लास्टिक और अन्य कचरे को समुद्र तट तक पहुंचने से पहले रोकना है। भारत क्लीन रिवर्स फाउंडेशन और बीएमसी द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया यह स्वदेशी "ट्रैस कैच" या "ट्रैस बूम" एक तैरती कन्वेयर प्रणाली की तरह काम करता है।
यह नाले में बह रहे कचरे को रोककर एक तरफ इकट्ठा करता है, जहां से उसे बाहर निकाला जाता है। फाउंडेशन के अनुसार, यह प्रणाली केवल वडाला से ही हर साल लगभग 200 टन कचरा मुंबई के समुद्र में जाने से रोकेगी।
माहुल परियोजना मुंबई में तेजी से बढ़ रहे ट्रैस बूम नेटवर्क का नवीनतम हिस्सा है, जिसे समुद्री प्रदूषण रोकने के लिए शहर की नदियों और नालों में लगाया जा रहा है। मुंबई में प्रतिदिन लगभग 6,600 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है।
हालांकि कचरे को एकत्रित कर कांजुरमार्ग और देवनार डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने की सुव्यवस्थित व्यवस्था मौजूद है, लेकिन बड़ी मात्रा में कचरा लैंडफिल तक पहुंचने के बजाय सीधे छोटे-बड़े नालों और जल निकायों, जैसे कि मीठी नदी में फेंक दिया जाता है।
शहर के विस्तृत स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज नेटवर्क और 82 प्रमुख नाले अंततः अरब सागर में मिलते हैं, जिसके कारण यह कचरा समुद्र में पहुंचकर जल प्रदूषण का कारण बनता है। नीदरलैंड स्थित गैर-लाभकारी संस्था द ओशन क्लीनअप द्वारा किए गए एक वर्ष लंबे' स्मार्ट रिवर सर्वे के अनुसार, मुंबई के 50 नालों से हर साल लगभग 5,000 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा अरब सागर में पहुंचता है। इसका असर 220 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 152 वर्ग किलोमीटर मैग्रोव क्षेत्र और 107 संरक्षित प्रजातियों पर पड़ता है।
प्रत्येक ट्रेस बूम प्रतिदिन कम से कम 1.5 टन तैरते ठोस कचरे को रोकता है। सामूहिक रूप से ये हजारों मीट्रिक टन कचरे को समुद्र और संरक्षित मैग्रोव क्षेत्रों में जाने से रोकते हैं। - बीएमसी अधिकारी
समुद्र में कचरा जाने से रोकने के लिए बीएमसी के स्टॉर्म वॉटर डेन्स विभाग ने वर्ष 2022 में पश्चिमी उपनगरों के छह स्थानों पर पायलट परियोजना के रूप में ट्रैस बूम लगाए थे। यह पहल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद शुरू की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, एक ट्रैस बूम की स्थापना पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि परिवहन पर 40 लाख रुपये और संचालन व रखरखाव पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं।
बीएमसी ने निजी संगठनों के साथ भी साझेदारी की है। सीएसआर फंडिंग से उषा नाला, देवनार ड्रेन, मीठी नदी और माहुल नाले में ट्रैस बूम लगाए गए है। माहुल का नवीनतम ट्रैस बूम भारत क्लीन रिवर फाउंडेशन द्वारा स्थापित किया गया है। अगले चरण में बीएमसी ने "द ओशन क्लीनअप" और "अल्फा मर्स जैसी निजी संस्थाओं को नौ स्थानों पर ट्रैस बूम लगाने का ठेका दिया है। द ओशन क्लीनअप मालाड और ट्रॉम्बे क्रीक में यह प्रणाली स्थापित करेगा। इसके अलावा राजेंद्र नगर नाला से लेकर कला नगर ड्रेन तक 11 नए स्थानों पर ट्रैस बूम लगाने की व्यवहार्यता जांच भी जारी है। बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, झुग्गी बस्तियों के पास जाल लगाने का काम भी शुरू कर दिया गया है ताकि स्रोत स्तर पर ही कचरे को रोका जा सके।
बीएमसी के रिकॉर्ड के अनुसार, मुंबई में वर्तमान में 21 सक्रिय ट्रैस बूम हैं। इनमें से 17 बीएमसी द्वारा स्थापित और संचालित किए जा रहे हैं, जबकि चार कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंडिंग के माध्यम से लगाए गए हैं। सबसे पहले वर्ष 2022 में दहिसर नदी, पोइसर नदी, ओशिवरा नदी तथा गजाधरबंद, एनएल रोड ड्रेन और मोगरा नाले में ट्रैस बूम लगाए गए।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले कचरा निकालने के लिए लोगों को फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म पर उतरकर हाथ से सफाई करनी पड़ती थी, जिसकी क्षमता सीमित थी और भारी श्रम लगता था। ट्रैस बूम लगने के बाद पूरी प्रक्रिया स्वचालित हो गई। अब यह प्रणाली कन्वेयर बेल्ट की तरह काम करती है और बड़ी मात्रा में तैरते कचरे को रोकती है।