सेंट्रल रेलवे के मुंबई उपनगरीय नेटवर्क के 15 स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम (EMR) के लिए लाइसेंसधारी तय।
RTI के जवाब में रेलवे ने संबंधित कंपनियों और अस्पतालों के नाम सार्वजनिक किए।
43 स्टेशनों पर मेडिकल रूम स्थापित करने की प्रक्रिया में अब तक 15 स्टेशनों के ठेकेदार तय होने की जानकारी।
सालाना लाइसेंस फीस का पूरा ब्योरा देने से रेलवे ने व्यावसायिक गोपनीयता का हवाला देकर इनकार किया।
शेष 28 स्टेशनों पर मेडिकल रूम कब शुरू होंगे, इसकी स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई।
Central Railway Mumbai Suburban Emergency Medical Room RTI: सेंट्रल रेलवे के मुंबई उपनगरीय नेटवर्क में 43 स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम स्थापित करने की प्रक्रिया के तहत अब तक 15 स्टेशनों के लिए लाइसेंसधारियों के नाम तय किए गए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता सचिन मौर्य को दिए गए जवाब में रेलवे ने संबंधित कंपनियों और अस्पतालों की जानकारी दी, लेकिन सालाना लाइसेंस फीस का ब्योरा व्यावसायिक गोपनीयता का हवाला देकर साझा नहीं किया। शेष 28 स्टेशनों पर सुविधा शुरू होने की समयसीमा भी स्पष्ट नहीं है।
मुंबई उपनगरीय रेलवे से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए आपातकालीन चिकित्सा सुविधा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सेंट्रल रेलवे ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत दिए गए जवाब में बताया है कि मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क के 15 स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम (EMR) संचालित करने के लिए लाइसेंसधारियों के नाम तय किए गए हैं।
इन मेडिकल रूम का उद्देश्य रेलवे स्टेशन पर किसी यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ने या दुर्घटना जैसी आपात स्थिति में तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना है। हालांकि, 43 स्टेशनों पर यह सुविधा शुरू करने की प्रक्रिया के बावजूद अब तक कितने स्टेशनों पर मेडिकल रूम वास्तव में चालू हो चुके हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
आरटीआई कार्यकर्ता सचिन मौर्य द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में रेलवे ने संबंधित लाइसेंसधारियों के नाम सार्वजनिक किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्टेशनों का ब्योरा इस प्रकार है।
अन्नी फाउंडेशन: कल्याण, भायखला और वाशी।
ममता अस्पताल: टिटवाला और मानखुर्द।
एसबी एंटरप्राइजेज: कुर्ला, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, ठाणे और चेंबूर।
श्री ओम साईं क्लिनिक: कर्जत और खोपोली।
मैजिक डिल हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड: भांडुप, कांजुरमार्ग और डोंबिवली।
एसटी फूड एंड एंटरप्राइजेज: घाटकोपर।
इस तरह, रेलवे की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में 15 स्टेशनों के लिए संबंधित एजेंसियों और अस्पतालों की जिम्मेदारी का विवरण सामने आया है।
इस मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठे हैं। आरटीआई के तहत 43 स्टेशनों की सूची के साथ प्रत्येक स्टेशन से मिलने वाली सालाना लाइसेंस फीस और मेडिकल रूम स्थापित करने से जुड़े नियमों की जानकारी मांगी गई थी।
रेलवे ने स्टेशनों की सूची और लाइसेंसधारियों के नाम तो उपलब्ध कराए, लेकिन सालाना लाइसेंस फीस की पूरी रकम बताने से इनकार कर दिया। इसके लिए व्यावसायिक गोपनीयता और संबंधित एजेंसियों के कारोबारी हित प्रभावित होने की आशंका का हवाला दिया गया।
रेलवे एक्टिविस्ट समीर झवेरी की ओर से वर्ष 2008 में दायर जनहित याचिका के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में रेलवे स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम शुरू करने से संबंधित आदेश दिया था। इसके बावजूद इस सुविधा को व्यापक स्तर पर लागू करने की प्रक्रिया में देरी का मुद्दा उठता रहा।
सचिन मौर्य के अनुसार, इस मामले में लगातार रेलवे प्रशासन से पत्राचार किया गया, जिसके बाद 43 स्टेशनों पर मेडिकल रूम के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई। हालिया आरटीआई जवाब से पता चला कि इनमें से अब तक 15 स्टेशनों के लिए लाइसेंसधारी तय किए गए हैं।
मौर्य ने कहा कि शेष 28 स्टेशनों पर भी मेडिकल रूम शुरू कराने के लिए उनका फॉलोअप जारी रहेगा, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्रियों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।
रेलवे नेटवर्क के कुल 43 स्टेशनों को इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें दादर, सायन, विक्रोली, कलवा, मुंब्रा, दिवा, विठ्ठलवाड़ी, कसारा, परेल, विद्याविहार, नाहुर, कोपर, ठाकुर्ली, खडवली, आसनगांव, इगतपुरी, वांगणी, शेलू, कलंबोली, तलोजा पंचनंद, उरण, पेन और रोहा सहित अन्य स्टेशन शामिल हैं।
हालांकि, शेष 28 स्टेशनों पर ठेकेदारों के चयन और मेडिकल रूम शुरू होने की तारीख को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यात्रियों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की योजना के पूर्ण क्रियान्वयन पर नजर बनी हुई है।