Mumbai Mayor Ritu Tawde Meeting: जन्म पंजीकरण और जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए अब हर महीने इसकी समीक्षा की जाएगी। मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने कहा कि जन्म पंजीकरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध नागरिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
बीएमसी मुख्यालय स्थित महापौर कक्ष में बुधवार को इस विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में महापौर रितु तावड़े के साथ पूर्व सांसद किरीट सोमैया भी मौजूद थे। इसके अलावा अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पश्चिम उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा, उप आयुक्त (सार्वजनिक स्वास्थ्य) शरद उघड़े, महाराष्ट्र शासन के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के मुख्य निबंधक विजय कांदेवाड सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने बताया कि नागरिक पंजीकरण प्रणाली के अंतर्गत जन्म और मृत्यु की घटनाओं का पंजीकरण केंद्र सरकार की कंप्यूटर प्रणाली पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में एक वर्ष से अधिक विलंब से हुए जन्म पंजीकरण के मामलों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। अन्य 23 विभागों में ऐसे 48 मामले पाए गए, जबकि अकेले एम पूर्व विभाग में 237 विलंबित जन्म पंजीकरण दर्ज किए गए थे।
शिकायत के बाद इन सभी 237 पंजीकरण को रद्द कर दिया गया। प्रशासन ने इनमें से 116 मूल जन्म प्रमाणपत्र अपने कब्जे में ले लिए हैं, जबकि 25 नागरिकों ने प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया है और 96 मामलों में प्रमाणपत्र अभी तक प्रशासन को नहीं मिले हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इन मामलों में जांच और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। महापौर रितु तावड़े ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर पुलिस सुरक्षा लेकर भी जांच और कार्रवाई की जाए। साथ ही आगामी बैठकों में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे से हर महीने इस पूरे विषय की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
बीएमसी में 'कैश-फॉर ट्रांसफर' मामले को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर अब रितु तावड़े का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अतिरिक्त आयुक्त अविनाश धाकने को भेजा गया विवादित पत्र उन्होंने नहीं लिखा है। इस दावे के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। दरअसल मीडिया में सामने आए एक पत्र में दावा किया गया था कि महापौर रितू तावड़े ने किसी अधिकारी के तबादले के संदर्भ में अतिरिक्त आयुक्त अविनाश ढाकने को सिफारिशी पत्र भेजा था। पत्र सार्वजनिक होने के बाद मनपा और राजनीतिक हलकों में 'कैश-फॉर-ट्रांसफर' को लेकर सवाल उठने लगे। इस मुद्दे ने शहर की राजनीति में हलचल पैदा कर दी।
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हालांकि विवाद बढ़ने के बाद महापौर रितु तावड़े ने स्पष्ट किया कि उक्त पत्र से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है और उन्होंने ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया। उनके इस बयान के बाद मामले की सत्यता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी नेताओं और कुछ पार्षदों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि महापौर के नाम से पत्र जारी हुआ है, तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि वह पत्र किसने तैयार किया और किसके निर्देश पर भेजा गया।