गेटवे ऑफ इंडिया पर फ्लोटिंग पॉटून शुल्क ₹90 से घटाकर ₹50 करने का प्रस्ताव।
जेटी नंबर 5 बंद होने से नाव संचालकों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।
राहुल नार्वेकर शुल्क विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं।
Gateway of India Mumbai Port: मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर निजी नाव और स्पीडबोट चलाने वालों को जल्द ही बड़ी राहत मिल सकती है। यहां नाव तक पहुंचने के लिए लगने वाले फ्लोटिंग पॉटून के शुल्क को लगभग आधा करने की तैयारी चल रही है।
मुंबई पोर्ट अथॉरिटी और रॉयल बॉम्बे यॉट क्लब के बीच चल रही बातचीत के तहत इस शुल्क को 90 से घटाकर 50 रुपए प्रति यात्री करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सुरक्षा का हवाला देकर ताज महल पैलेस के सामने वाली जेटी नंबर 5 बंद कर दी गई।
वहां लोहे का गेट लगाकर उस कंक्रीट स्लिपवे को रोक दिया गया, जिसे नाव संचालक 2006 से बिल्कुल मुफ्त इस्तेमाल कर रहे थे।
रास्ता बंद होने से संचालकों को अपनी नावों तक पहुंचने के लिए फ्लोटिंग पॉटून से होकर जाना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें शुल्क देना पड़ रहा है। इसके विरोध में संचालकों की एसोसिएशन बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गई है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि रास्ते से लोहे का गेट तुरंत हटाया जाए।
उन्हें पहले की तरह मुफ्त रास्ते से आने जाने दिया जाए। यदि यह संभव न हो, तो उन्हें दूसरी जेटियों का इस्तेमाल करने की अनुमति मिले।
संचालकों का तर्क है कि 2020 में जिस प्लेटफॉर्म के आधार पर फीस तय हुई थी, वह पुराना था। 2025 में लगाया गया नया प्लेटफॉर्म पूरी तरह अलग है और उसकी लागत भी नई है, इसलिए बिना किसी नई कानूनी मंजूरी के पुरानी महंगी दरें जबरन नहीं वसूली जा सकतीं।
यॉट ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन और पोर्ट प्रशासन के बीच गतिरोध दूर कराने के लिए महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर मध्यस्थता कर रहे हैं।
नार्वेकर का कहना है कि दोनों पक्षों को मान्य समाधान निकालने का प्रयास जारी है और मौजूदा दरों को लगभग आधा कराने का पूरा भरोसा है। पोर्ट अथॉरिटी और यॉट क्लब से जुड़े सूत्रों ने भी इस प्रस्ताव पर विचार विमर्श जारी रहने की पुष्टि की है।
फ्लोटिंग होटलों के 2018 के नियम निजी नौकाओं पर थोपने का विरोध करते हुए महासचिव वेतन राणे ने जेटी नंबर 5 की मरम्मत की मांग की। स्पीडबोट के लिए प्रति यात्री औसत न्यूनतम किराया 500 से 600 रुपए है।
ऐसे में यदि एमबीएपी को 90 से 100 रुपए का शुल्क दिया जाता है, तो यह लाभ मार्जिन को कम कर देगा और पर्यटकों पर बोझ बढ़ेगा। संचालकों ने कैटामारन जैसी वाजिब दरों पर जीएसटी सहित वैध शुल्क देने की सहमति जताई, ताकि पर्यटन किफायती रहे।
याचिका में आरोप है कि बिना टेंडर जेटी 5 का जिम्मा एक क्लब को दिया गया और संचालकों को जेटी 1 से 4 पर रोका गया, जेटी 5 को असुरक्षित बताए जाने पर स्ट्रक्चरल रिपोर्ट सार्वजनिक करने, स्वतंत्र ऑडिट और समयबद्ध मरम्मत की मांग की गई। साथ ही अवैध वसूली की वापसी और खातों के खुलासे की गुहार लगाई गई, जिस पर पोर्ट और क्लब का पक्ष आना बाकी है।