Mumbai Flood Risk BMC List: दक्षिण मुंबई के प्रमुख क्षेत्रों जैसे ओवल मैदान, मंत्रालय, केम्प्स कॉर्नर, चर्चगेट, मेट्रो सिनेमा और हुतात्मा चौक-जो वीआईपी आवाजाही वाले इलाके माने जाते हैं, इस वर्ष बीएमसी की बाढ़ संभावित स्थलों की सूची में शामिल हो गए हैं।
इस साल शहर में बाढ़ग्रस्त स्थानों की संख्या में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। ये इलाके, जो आमतौर पर जलभराव के लिए नहीं जाने जाते, पिछले वर्ष मानसून की शुरुआत के पहले ही दिन हुए भारी जलभराव के बाद सूची में जोड़े गए।
दक्षिण मुंबई के कई हिस्सों में 24 घंटे के भीतर 200 मिमी तक बारिश दर्ज की गई थी। बाढ़ संभावित स्थानों की पहचान पिछले वर्ष के जलभराव के पैटर्न के विश्लेषण के आधार पर की जाती है, जिसके अनुसार रोकथाम के उपाय लागू किए जाते हैं।
चूंकि इन इलाकों में पिछले साल भारी जलभराव हुआ था, इसलिए अधिकारियों ने इन्हें इस वर्ष की सूची में शामिल किया। 150 स्थान दक्षिण मुंबई में चिह्नित किए गए हैं।
बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में इन क्षेत्रों में केवल तीन बार 2006 की 26 जुलाई की भीषण बारिश, अगस्त 2020 की बारिश और पिछले वर्ष मई में समय से पहले आए मानसून के दौरान जलभराव हुआ था।
इस वर्ष बीएमसी ने मुंबई में कुल 496 बाढ़ संभावित स्थानों की पहचान की है, जो ऐसे निचले इलाके हैं जहां मध्यम या भारी बारिश के दौरान लंबे समय तक पानी भरने की आशंका रहती है। पिछले वर्ष यह संख्या 453 थी।
बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि हर साल नए निचले बाढ़ संभावित क्षेत्र सामने आते हैं। यह भूमि उपयोग में बदलाव और प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली पर प्रभाव से जुड़ा है। दक्षिण मुंबई में हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हुआ है, जिससे नालों में गाद और मलबा जमा हो गया है और जल निकासी बाधित हुई है।
इसी कारण कम समय में भारी बारिश होने पर यहां जलभराव हो जाता है। इनमें से लगभग 150 स्थान मुख्य शहर (आइलैंड सिटी) में स्थित है। फिलहाल 403 स्थानों पर समस्या का समाधान किया जा चुका है, जबकि बाकी स्थानों पर उपाय लागू किए जा रहे है।
उपायों के तहत अधिकांश स्थानों पर डिवॉटरिंग पंप लगाए गए हैं, जो जमा बारिश के पानी को नालों के जरिए समुद्र या प्राकृतिक जल स्रोतों तक पहुंचाते हैं। इसके अलावा, बीएमसी नालों से तैरता कचरा और मलबा भी हटा रही है ताकि पानी का प्रवाह सुचारु रहे।
- बीएमसी अधिकारी
स्लम इलाकों में जलजमाव को मिलती है। जो सीसी रोड का काम चल रहा है, इसमें ठेकेदार मलबों का सही तरह से निपटान नहीं करते हैं, जिससे मानसून का पानी सड़क पर भरने की संभावना रहती है। इसके अलावा छोटे नालों की सफाई अब तक पूरी नहीं हुई है, जो आगे चलकर मानसून में जलजमाव का कारण बन सकते हैं।
- रफीक शेख (कांग्रेस नगरसेवक, वार्ड 48)
अधिकारी ने बताया कि उपायों के तहत अधिकांश स्थानों पर डिवॉटरिंग पंप लगाए गए हैं, जो जमा बारिश के पानी को नालों के जरिए समुद्र या प्राकृतिक जल स्रोतों तक पहुंचाते हैं। इसके अलावा, बीएमसी नालों से तैरता कचरा और मलबा भी हटा रही है ताकि पानी का प्रवाह सुचारु रहे।
मेट्रो स्टेशनों पर भी डिवॉटरिंग पंप लगाए गए हैं, जिनमें मारोल नाका, आचार्य अत्रे चौक (वीं) और आरे स्टेशन शामिल हैं। ये सभी मुंबई की एक्वा लाइन पर स्थित है। यह कदम पिछले वर्ष के अनुभव के बाद उठाया गया, जब बारिश का पानी इन स्टेशनों में घुस गया था और सेवाएं बाधित हो गई थी।
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अधिकारियों के अनुसार आचार्य अत्रे चौक और मरोल जैसे स्टेशनों के प्रवेश द्वार ढलान पर है, जिससे सतह का पानी तेजी से अंदर आता है। उच्च क्षमता वाले पंप पानी को जमा नहीं होने देंगे और उसे बाहर निकाल देंगे। इससे पहले 28 अप्रैल को बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े ने कहा था कि इस वर्ष सभी डिवॉटरिंग पंप 5 मई तक संवेदनशील बाढ़ग्रस्त स्थानों पर एहतियात के तौर पर लगा दिए जाएंगे।